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ईरान को राहत देने की तैयारी, मानवीय मदद के लिए फ्रीज फंड जारी करने पर अमेरिका-कतर में मंथन

अमेरिका और कतर ईरान की जमी हुई अरबों डॉलर की संपत्तियों में से एक हिस्से को मानवीय सहायता के लिए जारी करने की योजना पर विचार कर रहे हैं। प्रस्ताव के तहत लगभग 6 अरब डॉलर तक की राशि खाद्य सामग्री और दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। यह कदम ईरान-अमेरिका संबंधों में नरमी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

ईरान की फ्रीज संपत्तियों को लेकर नई पहल

अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते ईरान की बड़ी धनराशि लंबे समय से विदेशों में फंसी हुई है। अब अमेरिका और कतर मिलकर इन फंड्स के आंशिक उपयोग पर विचार कर रहे हैं, ताकि मानवीय जरूरतों को पूरा किया जा सके।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह योजना मुख्य रूप से उन फंड्स पर आधारित है जो तेल बिक्री और अन्य वित्तीय लेनदेन से जुड़े हैं, लेकिन प्रतिबंधों के कारण उपयोग में नहीं आ पा रहे हैं।

6 अरब डॉलर तक की मानवीय सहायता का प्रस्ताव

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक चरण में कतर में रखे गए लगभग 6 अरब डॉलर तक के फंड को मानवीय कार्यों के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। इस योजना के तहत कतर, ईरान के केंद्रीय बैंक के निर्देशों के अनुसार खाद्य पदार्थ, दवाएं और अन्य जरूरी वस्तुएं खरीदेगा। इसका उद्देश्य ईरानी जनता को आवश्यक राहत उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।

अमेरिका-कतर की भूमिका और कूटनीतिक संकेत

इस पहल में कतर को एक मध्यस्थ और वित्तीय संचालनकर्ता की भूमिका में देखा जा रहा है। कतर पहले भी ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का समर्थन करता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम हालिया ईरान-अमेरिका शांति समझौते से जुड़ा हो सकता है और क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में एक कूटनीतिक प्रयास माना जा रहा है।

ईरान का अमेरिका पर सख्त रुख

ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि लेबनान समेत क्षेत्रीय संघर्षों को खत्म करने की जिम्मेदारी वॉशिंगटन की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से बातचीत के दौरान यह बात कही। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी समझौते का उल्लंघन होता है तो इसके लिए अमेरिका जिम्मेदार होगा।

लेबनान संकट और क्षेत्रीय तनाव

इसी बीच लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। हाल ही में हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने कहा कि उनका संगठन किसी भी तरह के कब्जे को स्वीकार नहीं करेगा और अपने लक्ष्य पर कायम रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनके खिलाफ हमला किया गया तो संगठन भी कड़ा जवाब देगा, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका है।

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