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अलवर एडीजे कोर्ट का कड़ा फैसला, लूट के आरोपी को 10 साल और गौ तस्करी के दोषी को 7 साल की सजा

अलवर की एडीजे कोर्ट संख्या-3 ने दो अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने एक मामले में लूट के आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास और दूसरे मामले में गौ तस्करी के आरोपी को 7 वर्ष की सजा सुनाई है। दोनों मामलों में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को आधार बनाते हुए दोष सिद्ध माना और जुर्माना भी लगाया।

सरिस्का में स्कॉर्पियो लूटने वाले आरोपी को 10 साल की सजा

पहला मामला थानागाजी थाना क्षेत्र में वर्ष 2018 में हुई लूट की वारदात से जुड़ा है। परिवादी विनोद कुमार किराये पर स्कॉर्पियो वाहन चलाता था। उसे सरिस्का में बंदरों को केले खिलाने के बहाने वाहन बुक कराया गया। रास्ते में पहुंचने के बाद बदमाशों ने चालक को हथियार दिखाकर धमकाया, उसका गला दबाया और हवाई फायर कर वाहन लूट लिया। वारदात के बाद आरोपी वाहन लेकर फरार हो गए थे। पुलिस जांच के बाद मामला अदालत में पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।

गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर दोष सिद्ध

लूट के इस मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष 14 गवाहों के बयान और 24 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद एडीजे कोर्ट संख्या-3 की न्यायाधीश ज्योति के. सोनी ने आरोपी रामसिंह को दोषी माना। अदालत ने उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई तथा 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। न्यायालय ने माना कि आरोपी के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्य अपराध को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं।

गौ तस्करी मामले में आरोपी को 7 साल की सजा

दूसरा मामला अकबरपुर थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने गौ तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। पुलिस को सूचना मिली थी कि माधोगढ़ क्षेत्र के पास एक पिकअप वाहन में गौवंश को अमानवीय तरीके से ले जाया जा रहा है। सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने वाहन को रोका और उसमें मौजूद गौवंश को मुक्त कराया। जांच में सामने आया कि पशुओं के मुंह और पैर रस्सियों से बांधकर उन्हें वाहन में ठूंसकर ले जाया जा रहा था।

पांच गौवंश बरामद, आरोपी को ठहराया दोषी

पुलिस ने मौके से पांच गौवंश बरामद किए और आरोपी कासम खान पुत्र फजरूखान निवासी बिरसंगपुर, किशनगढ़बास को गिरफ्तार कर लिया। मामले की जांच पूरी होने के बाद अदालत में चालान पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए आरोपी को दोषी ठहराया। न्यायालय ने कासम खान को 7 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई और 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

अपराधियों को सख्त संदेश

दोनों मामलों में सुनाए गए फैसलों को कानून व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि लूट और गौ तस्करी जैसे गंभीर अपराधों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले अपराधियों के लिए कड़ा संदेश हैं और कानून के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत करते हैं।

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