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अमेरिका-ईरान समझौते से भारत को राहत, होर्मुज से निकलेंगे 40 टैंकर, LPG सप्लाई सुधरने की उम्मीद

अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद भारत के लिए बड़ी राहत की उम्मीद जगी है। होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे तेल और गैस से लदे करीब 40 टैंकर अब भारत की ओर बढ़ सकते हैं। इससे एलपीजी की आपूर्ति में आई बाधा कम होने और ऊर्जा संकट से राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से भारत को मिल सकती है राहत

पश्चिम एशिया में लंबे समय तक चले तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। इसका असर भारत समेत कई एशियाई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा। अब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तेल और गैस से लदे करीब 40 जहाज जल्द ही भारत की ओर रवाना हो सकते हैं, जिससे आपूर्ति व्यवस्था सामान्य होने में मदद मिलेगी।

LPG की कमी से जूझ रहे बाजार को मिल सकता है सहारा

होर्मुज मार्ग में बाधा का सबसे अधिक असर एलपीजी आपूर्ति पर पड़ा था। भारत में रसोई गैस की बड़ी मात्रा खाड़ी देशों से आयात की जाती है और युद्ध के दौरान सप्लाई प्रभावित होने से दबाव बढ़ गया था। अब विशेषज्ञों का मानना है कि जहाजों की आवाजाही सामान्य होने के साथ एलपीजी की उपलब्धता में सुधार होगा और बाजार में आपूर्ति का संतुलन वापस लौट सकता है।

चरणबद्ध तरीके से सामान्य होगी सप्लाई

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने में कुछ समय लग सकता है। अलग-अलग ईंधनों पर संकट का असर अलग रहा है, इसलिए रिकवरी भी चरणबद्ध तरीके से होने की संभावना है। सबसे पहले एलपीजी और एलएनजी कार्गो की आवाजाही तेज होने की उम्मीद है, जबकि कच्चे तेल की सप्लाई धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर लौट सकती है।

भारतीय रिफाइनिंग सेक्टर को मिलेगा फायदा

खाड़ी क्षेत्र से शिपिंग गतिविधियां सामान्य होने पर जहाजों की उपलब्धता बढ़ेगी और प्रमुख उत्पादक देशों से कार्गो की आपूर्ति आसान होगी। इससे भारत के रिफाइनिंग सेक्टर को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लाई बहाल होने से ईंधन बाजार में स्थिरता आएगी और आयात संबंधी दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है।

ऊर्जा सुरक्षा को लेकर मिली नई चेतावनी

पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने इस संकट को ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण चेतावनी बताया है। उनका मानना है कि भारत को भविष्य में संभावित सप्लाई व्यवधानों से निपटने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बढ़ाने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर तेजी से काम करने की जरूरत है। साथ ही दीर्घकालिक स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में निवेश बढ़ाना भी आवश्यक माना जा रहा है।

वैश्विक हालात पर बनी रहेगी नजर

हालांकि शांति समझौते के बाद राहत की उम्मीद बढ़ी है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा। यदि समझौता लंबे समय तक कायम रहता है तो भारत समेत कई देशों को ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों के मोर्चे पर राहत मिल सकती है।

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