अमेरिका से समझौते के बाद हसन खुमैनी का बड़ा बयान, बोले- अब शुरू होगा असली संघर्ष
ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते के बाद ईरान के संस्थापक अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के पोते हसन खुमैनी ने इसे तेहरान की बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि अब देश के भीतर एक नए प्रकार के संघर्ष की शुरुआत होगी, जिसमें राष्ट्रीय एकता और विकास को प्राथमिकता देनी होगी।
हसन खुमैनी ने समझौते को बताया ईरान की सफलता
ईरान के प्रमुख धार्मिक नेता और पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के पोते हसन खुमैनी ने अमेरिका के साथ हुए समझौते को ईरान की महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में देश को आंतरिक मतभेदों से ऊपर उठकर भविष्य की मजबूती और प्रगति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
‘बड़ा जिहाद’ से विकास और एकता का दिया संदेश
अपने संबोधन में हसन खुमैनी ने कहा कि अब असली चुनौती देश के भीतर एकजुटता बनाए रखने और स्वार्थ व अहंकार से पैदा होने वाले विवादों से दूर रहने की है। उनके अनुसार, आने वाले समय में ईरान को आर्थिक और सामाजिक मोर्चों पर मजबूत बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत होगी।
ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान में हसन खुमैनी का महत्व
54 वर्षीय हसन खुमैनी सीधे तौर पर सरकार में किसी पद पर नहीं हैं, लेकिन ईरान की राजनीति और धार्मिक हलकों में उनका प्रभाव माना जाता है। वह तेहरान स्थित अपने दादा अयातुल्ला खुमैनी के मकबरे के संरक्षक हैं और उन्हें अपेक्षाकृत उदारवादी धड़े का चेहरा माना जाता है। अली खामेनेई के बाद संभावित नेतृत्व को लेकर भी उनका नाम चर्चा में रहा है।
समझौते पर ईरान के भीतर मतभेद की चर्चा
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के कुछ कट्टरपंथी नेताओं ने अमेरिका के साथ हुए समझौते को लेकर असहमति जताई है। ऐसे माहौल में हसन खुमैनी का सार्वजनिक समर्थन सरकार के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे समझौते के पक्ष में एक मजबूत संदेश जाने की संभावना है।
ईरान-अमेरिका समझौते में क्या-क्या शामिल है
दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के बाद लागू हुए समझौते में कई प्रमुख बिंदु शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें क्षेत्रीय तनाव कम करना, एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान, होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही, आर्थिक सहयोग बढ़ाना, प्रतिबंधों में राहत और परमाणु कार्यक्रम पर आगे बातचीत जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा समझौते के क्रियान्वयन के लिए निगरानी तंत्र और आगे औपचारिक वार्ता की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है।