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गुरुग्राम में साइबर ठगी के बड़े रैकेट का पर्दाफाश, 3 आरोपी गिरफ्तार; दुबई कनेक्शन भी आया सामने

गुरुग्राम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह दिल्ली से संचालित होकर देशभर के लोगों को निवेश के नाम पर ठगी का शिकार बना रहा था। जांच में करोड़ों रुपये के साइबर फ्रॉड, फर्जी बैंक खातों और संदिग्ध डिजिटल नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस को मामले में दुबई कनेक्शन मिलने के बाद जांच और भी गहरी हो गई है।

दिल्ली के फ्लैट से संचालित हो रहा था ठगी का नेटवर्क

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह दिल्ली के दिलशाद गार्डन इलाके में किराए के फ्लैट से अपना नेटवर्क चला रहा था। गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली निवासी जनक, रेवाड़ी निवासी दिनेश कुमार और फतेहाबाद निवासी पवन कुमार शामिल हैं। तीनों पर आरोप है कि वे संगठित तरीके से साइबर ठगी की गतिविधियों में शामिल थे। पुलिस का कहना है कि आरोपी देशभर के लोगों को ऑनलाइन निवेश और मुनाफे का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। प्रारंभिक जांच में इनके कई अन्य साथियों के शामिल होने की भी आशंका जताई गई है।

दुबई में रह चुका आरोपी, अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच

जांच एजेंसियों के अनुसार फतेहाबाद निवासी पवन कुमार पहले दुबई में रह चुका है। पुलिस को संदेह है कि उसने वहीं से साइबर अपराध के उन्नत तौर-तरीके सीखे और भारत लौटने के बाद गिरोह के संचालन में अहम भूमिका निभाई। इसी वजह से अब मामले की जांच केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं इस नेटवर्क के तार विदेशों में सक्रिय साइबर अपराधियों से तो नहीं जुड़े हुए हैं।

2.53 करोड़ की ठगी से खुली परतें

मामले का खुलासा तब हुआ जब गुरुग्राम निवासी एक व्यक्ति ने 2.53 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी गई रकम का एक हिस्सा विभिन्न खातों के जरिए ट्रांसफर किया गया था। इनमें एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का बैंक खाता भी शामिल था। खाते में दर्ज मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण करने पर पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में सफलता मिली। डिजिटल ट्रैकिंग और मोबाइल लोकेशन के आधार पर तीनों आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया।

छापेमारी में बरामद हुआ भारी सामान

क्राइम ब्रांच द्वारा आरोपियों के ठिकाने पर की गई कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में संदिग्ध सामग्री बरामद की गई। पुलिस ने 25 पासपोर्ट, 53 एटीएम कार्ड, 5 चेकबुक, 36 मोबाइल फोन और 2 आईपी कैमरे जब्त किए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन सामानों का उपयोग फर्जी बैंक खाते खोलने, वित्तीय लेन-देन छिपाने और साइबर अपराधों को अंजाम देने में किया जाता था। बरामद सामग्री की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।

टेलीग्राम के जरिए होता था संचालन

पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए अपने हैंडलरों और अन्य सदस्यों के संपर्क में रहते थे। उन्हें विभिन्न बैंक खातों में आने वाली ठगी की रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर करने का काम सौंपा जाता था। इसके बदले उन्हें मासिक भुगतान और ठगी की रकम पर अतिरिक्त बोनस मिलता था। पुलिस का कहना है कि पिछले करीब छह महीने से यह गिरोह सक्रिय रूप से साइबर अपराधों में शामिल था।

निवेश के नाम पर लोगों को बनाते थे शिकार

जांच में सामने आया कि गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद योजनाबद्ध थी। आरोपी लोगों को घर बैठे मोटी कमाई और सुरक्षित निवेश का झांसा देते थे। इसके बाद उन्हें एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कराया जाता था। पोर्टल पर निवेश की गई रकम और कथित मुनाफा लगातार बढ़ता हुआ दिखाई देता था, जिससे निवेशक और अधिक पैसा लगाने के लिए प्रेरित होते थे। लेकिन जब कोई व्यक्ति अपनी राशि निकालने का प्रयास करता, तो उसका अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता और पूरा पैसा आरोपी हड़प लेते थे।

कई राज्यों में फैला है नेटवर्क

पुलिस की प्रारंभिक जांच में इस गिरोह के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज कम से कम 15 शिकायतों का पता चला है। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, ठगी के मामलों और पीड़ितों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। फिलहाल पुलिस बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्ध लोगों की पहचान करने में जुटी हुई है।

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