ईरान की जब्त संपत्ति लौटाने को तैयार ट्रंप, बोले- वह पैसा हमारा नहीं है
ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की जब्त संपत्तियों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। ट्रंप का कहना है कि किसी दूसरे देश की संपत्ति को अनिश्चित समय तक रोके रखना वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के लिए सही नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन संसाधनों के उपयोग में ईरान को जिम्मेदार रवैया अपनाना होगा।
शांति समझौते के बाद लिया गया अहम फैसला
ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बाद दोनों देशों ने शांति समझौते पर आधिकारिक मुहर लगा दी है। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की जब्त संपत्तियों को लेकर बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया। ट्रंप का मानना है कि किसी देश के धन को अनिश्चित समय तक रोककर रखना अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में विश्वास को प्रभावित कर सकता है।
ट्रंप ने फैसले के पीछे बताई वजह
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में कहा कि जिन संपत्तियों को फ्रीज किया गया था, वे मूल रूप से ईरान की हैं। उनके अनुसार, यदि अमेरिका लंबे समय तक दूसरे देशों के धन को अपने पास रखता है तो इससे डॉलर और वैश्विक वित्तीय प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने इस फैसले को उचित और आवश्यक बताया।
ईरान के लिए रखी गई शर्तें
हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि संपत्तियों की बहाली के साथ ईरान से जिम्मेदार व्यवहार की उम्मीद की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में ईरान के कदमों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए आगे की प्रक्रिया तय होगी। यानी राहत के साथ निगरानी और शर्तों का पहलू भी बना रहेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य हो रही गतिविधियां
समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री गतिविधियों को भी बहाल कर दिया गया है। क्षेत्र में पहले लगाए गए प्रतिबंधों और नाकेबंदी में ढील मिलने के बाद जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू हो गई है। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह सामान्य हो जाएंगी।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती सहमति का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ऊर्जा क्षेत्र पर भी दिखाई दे सकता है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है, इसलिए क्षेत्र में स्थिरता आने से वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति को राहत मिलने की संभावना है।