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तुर्की के ‘ड्रोन किलर’ सिस्टम पर पाकिस्तान का भरोसा बढ़ा, एयर डिफेंस मजबूत करने की कोशिश

पाकिस्तान की ओर से तुर्की के अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम को अपने रक्षा नेटवर्क में शामिल किए जाने की खबरें सामने आई हैं। माना जा रहा है कि इस कदम का उद्देश्य आधुनिक ड्रोन खतरों से निपटने की क्षमता को मजबूत करना है। हाल के वर्षों में ड्रोन युद्ध तकनीक के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच पाकिस्तान और तुर्की के रक्षा सहयोग को नई दिशा मिलती दिखाई दे रही है।

तुर्की के एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती की खबरें

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तुर्की निर्मित ASELSAN ŞAHİN 40mm Counter-UAS System को पाकिस्तान को सौंपा गया है। यह सिस्टम छोटे और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन को निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया है। हालांकि इन रिपोर्टों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे पाकिस्तान की वायु सुरक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देख रहे हैं।

क्या है ‘ड्रोन किलर’ ŞAHİN सिस्टम?

तुर्की की रक्षा कंपनी ASELSAN द्वारा विकसित ŞAHİN 40mm Counter-UAS System को विशेष रूप से माइक्रो और मिनी ड्रोन से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। यह आधुनिक राडार और कैमरा सिस्टम से लैस रिमोट-नियंत्रित हथियार प्रणाली है। कंपनी के अनुसार, यह केवल ड्रोन के संचार को बाधित नहीं करता, बल्कि विशेष गोला-बारूद की मदद से उन्हें हवा में ही नष्ट करने की क्षमता रखता है।

पाकिस्तान और तुर्की के रक्षा सहयोग का विस्तार

पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान और तुर्की के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। दोनों देश पारंपरिक हथियार खरीद से आगे बढ़कर तकनीकी साझेदारी, सैन्य आधुनिकीकरण और संयुक्त औद्योगिक परियोजनाओं पर भी काम कर रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में बढ़ती यह साझेदारी दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करती दिखाई दे रही है।

बदलती युद्ध तकनीक के बीच बढ़ा ड्रोन का महत्व

आधुनिक युद्ध में ड्रोन तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। निगरानी, टोही और सटीक हमलों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इसी कारण कई देश अब एंटी-ड्रोन सिस्टम विकसित करने और अपने रक्षा नेटवर्क को नई तकनीकों से लैस करने पर जोर दे रहे हैं। पाकिस्तान का यह कदम भी इसी वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा माना जा रहा है।

क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर रहेगी नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया में रक्षा तकनीकों के आधुनिकीकरण की दौड़ आने वाले समय में और तेज हो सकती है। नई प्रणालियों की तैनाती से क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल पाकिस्तान और तुर्की के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग पर अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।

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