PoK में पाकिस्तान के खिलाफ बढ़ा असंतोष, प्रदर्शनकारी नेताओं ने आर्थिक आजादी की उठाई मांग
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। हाल ही में रावलकोट में आयोजित एक सभा में प्रदर्शनकारी नेताओं ने पाकिस्तान की नीतियों पर सवाल उठाते हुए क्षेत्र के लिए अधिक आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों की मांग की। इस दौरान कुछ नेताओं ने वैकल्पिक व्यापार मार्गों की जरूरत पर भी जोर दिया।
आर्थिक मुद्दों से शुरू हुआ आंदोलन, अब राजनीतिक स्वर भी तेज
PoK में आंदोलन की शुरुआत बिजली दरों में बढ़ोतरी और गेहूं की कीमतों को लेकर हुई थी। बढ़ती महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की लागत से परेशान लोगों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए थे। बाद में यह आंदोलन केवल आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्थानीय संसाधनों पर अधिकार, प्रशासनिक व्यवस्था और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए।
रावलकोट की सभा में पाकिस्तान की नीतियों पर उठे सवाल
हाल ही में रावलकोट में आयोजित सभा में जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और अन्य संगठनों के नेताओं ने पाकिस्तान के सैन्य और प्रशासनिक ढांचे की आलोचना की। नेताओं का आरोप है कि क्षेत्र के संसाधनों का उचित उपयोग नहीं हो रहा और स्थानीय लोगों की समस्याओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि मौजूदा आर्थिक चुनौतियों का स्थायी समाधान आवश्यक है।
वैकल्पिक व्यापार मार्गों की मांग ने खींचा ध्यान
सभा के दौरान कुछ नेताओं ने कहा कि यदि क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर नहीं बनाया गया तो वैकल्पिक व्यापार विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए। इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक नीति या निर्णय सामने नहीं आया है, लेकिन इन बयानों को क्षेत्र में बढ़ते असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पहले भी विरोध के बाद देना पड़ा था राहत पैकेज
वर्ष 2024 में हुए व्यापक प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान सरकार को कुछ राहत उपायों की घोषणा करनी पड़ी थी। इनमें गेहूं पर सब्सिडी और बिजली दरों में राहत जैसे कदम शामिल थे। हालांकि आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि ये फैसले अस्थायी समाधान हैं और मूल समस्याओं का स्थायी समाधान अभी बाकी है।
क्षेत्र में बदलते हालात पर बनी हुई है नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि PoK में बढ़ता जन असंतोष आने वाले समय में राजनीतिक और आर्थिक बहस को और तेज कर सकता है। फिलहाल क्षेत्र की स्थिति और वहां के घटनाक्रम पर स्थानीय संगठनों, पाकिस्तान सरकार और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की नजर बनी हुई है।