Explainer: क्या अपने ही रणनीतिक जाल में उलझ रहा अमेरिका? ईरान-लेबनान के लिए चीन की नई पहल के मायने समझिए
अमेरिका-ईरान संघर्ष थमने के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। चीन ने ईरान और लेबनान के पुनर्निर्माण तथा मानवीय सहायता में सहयोग का ऐलान कर एक बार फिर संकेत दिया है कि वह क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका के विरोधियों के साथ चीन की बढ़ती नजदीकियां वैश्विक शक्ति संतुलन को नई दिशा दे सकती हैं?
मानवीय सहायता के बहाने चीन की रणनीतिक एंट्री
बीजिंग ने ईरान और लेबनान में युद्ध के कारण पैदा हुए मानवीय संकट पर चिंता जताते हुए दोनों देशों के पुनर्वास और आर्थिक सुधार में सहयोग की बात कही है। आधिकारिक तौर पर इसे मानवीय मदद बताया जा रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार इसे चीन की दीर्घकालिक भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। चीन ऐसे क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहता है जहां अमेरिका का प्रभाव चुनौती का सामना कर रहा है।
अमेरिका के विरोधी देशों के साथ बढ़ रही चीन की नजदीकी
पिछले कुछ वर्षों में चीन ने उन देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने की नीति अपनाई है, जिनके संबंध अमेरिका के साथ तनावपूर्ण रहे हैं। ईरान पहले से ही चीन के लिए महत्वपूर्ण साझेदार रहा है और अब लेबनान में भी बीजिंग अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। इससे यह संदेश भी जाता है कि चीन वैश्विक स्तर पर अमेरिका के प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
ईरानी तेल और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है चीन का हित
चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है और ईरान उसके लिए लंबे समय से ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद चीन विभिन्न माध्यमों से ईरानी तेल खरीदता रहा है। हालिया संघर्ष के दौरान ईरान की स्थिति कमजोर होने से चीन की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हित प्रभावित हो सकते थे। ऐसे में ईरान के पुनर्निर्माण में सहयोग चीन के आर्थिक हितों से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
क्या अमेरिका की नीतियां चीन के लिए अवसर बन रही हैं?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका की कठोर प्रतिबंध नीति और क्षेत्रीय संघर्षों ने कई देशों को वैकल्पिक साझेदार तलाशने के लिए प्रेरित किया है। चीन इसी खाली जगह को भरने की कोशिश कर रहा है। यदि ईरान और लेबनान जैसे देशों में चीन का प्रभाव बढ़ता है, तो इससे अमेरिका की रणनीतिक पकड़ को चुनौती मिल सकती है। यही वजह है कि कुछ विश्लेषक इसे अमेरिका के लिए दीर्घकालिक कूटनीतिक चुनौती के रूप में देख रहे हैं।
लेबनान में भी बढ़ सकता है चीन का प्रभाव
लेबनान लंबे समय से आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। ऐसे में चीन की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता और निवेश भविष्य में उसके प्रभाव को मजबूत कर सकते हैं। हालांकि लेबनान की आधिकारिक सरकार और पश्चिमी देशों के बीच भी संबंध बने हुए हैं, लेकिन क्षेत्रीय परिस्थितियों के कारण नए समीकरण बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों का क्या होगा असर?
ईरान, लेबनान, चीन, अमेरिका और इजरायल के बीच बन रहे नए समीकरण आने वाले समय में पश्चिम एशिया की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। चीन जहां आर्थिक सहयोग और निवेश के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, वहीं अमेरिका अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ क्षेत्र में अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करेगा। ऐसे में आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में कूटनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।