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बाल झड़ना और नाखून टूटना हो सकते हैं Biotin Deficiency के संकेत, जानिए शरीर के ये अहम लक्षण

अगर आपके बाल तेजी से झड़ रहे हैं, नाखून बार-बार टूट रहे हैं या त्वचा पर अजीब तरह के रैशेज दिखाई दे रहे हैं, तो इन्हें केवल सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ये लक्षण शरीर में बायोटिन यानी विटामिन B7 की कमी की ओर इशारा कर सकते हैं। यह पोषक तत्व शरीर में ऊर्जा उत्पादन से लेकर बालों, त्वचा और नाखूनों को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

क्या है बायोटिन और क्यों है यह जरूरी?

बायोटिन, जिसे विटामिन B7 के नाम से भी जाना जाता है, पानी में घुलने वाला एक आवश्यक बी-विटामिन है। यह शरीर में कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन के मेटाबॉलिज्म को सुचारु रूप से चलाने में मदद करता है। इसके अलावा यह तंत्रिका तंत्र, त्वचा, बालों और नाखूनों के स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। सामान्य परिस्थितियों में इसकी कमी कम देखने को मिलती है, क्योंकि यह कई खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है। हालांकि कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में इसकी कमी विकसित हो सकती है।

बाल झड़ना और कमजोर नाखून हो सकते हैं चेतावनी के संकेत

बायोटिन की कमी होने पर सबसे पहले असर बालों और नाखूनों पर दिखाई दे सकता है। बाल पतले होने लगते हैं या सामान्य से अधिक झड़ सकते हैं। वहीं नाखून कमजोर होकर बार-बार टूटने लगते हैं और उनमें दरारें भी पड़ सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन समस्याओं के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए केवल इन्हीं लक्षणों के आधार पर निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।

त्वचा पर रैशेज और लगातार थकान को न करें नजरअंदाज

बायोटिन की कमी त्वचा पर भी असर डाल सकती है। आंखों, नाक और मुंह के आसपास लाल या पपड़ीदार चकत्ते दिखाई देना इसका एक संकेत माना जाता है। इसके अलावा शरीर में ऊर्जा उत्पादन प्रभावित होने से व्यक्ति को लगातार थकान, कमजोरी और सुस्ती महसूस हो सकती है। कई बार लोग इन लक्षणों को सामान्य मान लेते हैं, जबकि यह किसी पोषण संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है।

गंभीर स्थिति में तंत्रिका तंत्र पर भी पड़ सकता है असर

यदि बायोटिन की कमी लंबे समय तक बनी रहे तो इसका प्रभाव तंत्रिका तंत्र और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। कुछ लोगों में हाथ-पैरों में झुनझुनी, संतुलन बनाए रखने में कठिनाई, मानसिक सुस्ती या अवसाद जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे मामलों में समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो जाता है, ताकि समस्या को गंभीर होने से पहले नियंत्रित किया जा सके।

किन लोगों में ज्यादा होता है बायोटिन की कमी का खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य लोगों में बायोटिन की कमी दुर्लभ होती है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में इसका खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय तक कच्चे अंडे की सफेदी का अधिक सेवन, गर्भावस्था, कुछ आनुवंशिक विकार, लंबे समय तक एंटीबायोटिक या एंटी-सीजर दवाओं का उपयोग और ऐसी बीमारियां जिनमें पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित होता है, इनमें शामिल हैं।

इन खाद्य पदार्थों से मिल सकता है पर्याप्त बायोटिन

बायोटिन की पूर्ति के लिए संतुलित आहार सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। अंडे, मछली, मांस, दूध और डेयरी उत्पाद, बादाम और अन्य नट्स, बीज, शकरकंद तथा साबुत अनाज बायोटिन के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। सामान्य रूप से संतुलित भोजन करने वाले अधिकांश लोगों को भोजन से ही पर्याप्त मात्रा में यह पोषक तत्व मिल जाता है।

कब लें डॉक्टर की सलाह?

यदि बाल झड़ने, नाखून टूटने, त्वचा पर रैशेज या लगातार थकान जैसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। इन समस्याओं के पीछे केवल बायोटिन की कमी ही नहीं, बल्कि आयरन की कमी, विटामिन D की कमी, थायरॉयड विकार या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं।

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