चीन की बढ़ती सैन्य ताकत पर अमेरिका चिंतित, नए हथियारों के लिए 122 अरब डॉलर की मांग
चीन की तेज़ी से बढ़ रही सैन्य क्षमताओं और ताइवान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के हिंद-प्रशांत क्षेत्र के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी एडमिरल सैम पपारो ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस से नए हथियारों और रक्षा प्रणालियों के लिए 122 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि की मांग की है। उनका कहना है कि क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं और अमेरिका को अपनी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करनी होगी।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते खतरे पर अमेरिकी चेतावनी
अमेरिका के हिंद-प्रशांत क्षेत्र के कमांडर एडमिरल सैम पपारो ने अमेरिकी सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति पहले की तुलना में अधिक जटिल और संवेदनशील होती जा रही है। उनके अनुसार, संभावित संघर्षों और संकटों की आशंका बढ़ रही है, जिसके मद्देनजर अमेरिकी सेना को आधुनिक हथियारों और नई तकनीकों से लैस करना आवश्यक हो गया है। उनका मानना है कि मजबूत सैन्य तैयारी ही भविष्य के किसी बड़े टकराव को रोकने में मदद कर सकती है।
मिसाइल, निगरानी प्रणाली और ड्रोन पर होगा बड़ा निवेश
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित बजट का बड़ा हिस्सा मिसाइल प्रणालियों, सैन्य कमांड एवं कंट्रोल नेटवर्क, अंतरिक्ष आधारित चेतावनी प्रणालियों और निगरानी उपकरणों पर खर्च किया जा सकता है। इसके अलावा समुद्री और जमीनी ड्रोन क्षमता को भी मजबूत करने की योजना बताई जा रही है। हालांकि अभी तक अमेरिकी रक्षा विभाग या संबंधित सैन्य कमांड की ओर से इस आकलन का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
चीन के सैन्य विस्तार को लेकर बढ़ी चिंता
एडमिरल पपारो ने कहा कि चीन लगातार अपनी सैन्य ताकत का विस्तार कर रहा है और आधुनिक तकनीकों के जरिए अपनी क्षमताओं को बढ़ाने में जुटा है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजिंग क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने के साथ-साथ रूस और उत्तर कोरिया जैसे देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इन घटनाक्रमों से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का सुरक्षा वातावरण और अधिक चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
ताइवान को लेकर बढ़ रहा रणनीतिक दबाव
अमेरिकी सैन्य नेतृत्व का मानना है कि चीन ताइवान से जुड़े अपने दीर्घकालिक उद्देश्यों को लेकर सैन्य तैयारियों में तेजी ला रहा है। इसी कारण अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में ताइवान मुद्दा वैश्विक राजनीति और सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।