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अमेरिका की रणनीति में बदलाव के संकेत? ‘इंडो-पैसिफिक’ से ‘इंडो’ हटने के बाद G-2 थ्योरी पर तेज हुई बहस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित मुलाकात से पहले अमेरिका के सैन्य ढांचे में हुए एक बदलाव ने रणनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। अमेरिकी प्रशासन ने अपने सैन्य कमांड के नाम से ‘इंडो’ शब्द हटाकर पुराने ‘पैसिफिक कमांड’ नाम को फिर से अपनाने का फैसला किया है। इस कदम के बाद विशेषज्ञों के बीच अमेरिका-चीन संबंधों, भारत की भूमिका और कथित G-2 व्यवस्था को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।

नाम बदला, लेकिन मिशन में बदलाव से किया इनकार

अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कमांड के नाम में बदलाव केवल प्रतीकात्मक है और इससे उसकी जिम्मेदारियों या क्षेत्रीय रणनीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अमेरिका का कहना है कि उसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में स्वतंत्र और खुले समुद्री मार्गों को बनाए रखना और सहयोगी देशों के साथ मिलकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। हालांकि इस बदलाव ने भू-राजनीतिक विश्लेषकों के बीच नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

G-2 थ्योरी पर फिर शुरू हुई बहस

कुछ रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच टकराव कम करने की कोशिशें तेज हुई हैं। इसी आधार पर G-2 यानी दुनिया की दो प्रमुख शक्तियों के बीच संभावित समझ और प्रभाव क्षेत्रों के बंटवारे की थ्योरी को लेकर चर्चा बढ़ी है। हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। कई विशेषज्ञ इसे केवल अटकलें मानते हैं, जबकि कुछ इसे वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत बता रहे हैं।

भारत की भूमिका को लेकर अलग-अलग राय

विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि इस बदलाव का सीधा संबंध भारत से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, इंडो-पैसिफिक रणनीति की दिशा में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि भारत का महत्व कम हो गया है। दूसरी ओर कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की प्राथमिकताओं में परिवर्तन से क्षेत्रीय समीकरणों पर असर पड़ सकता है। भारत, ऑस्ट्रेलिया और अन्य साझेदार देशों के लिए भविष्य में आत्मनिर्भर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की जरूरत और बढ़ सकती है।

चीन की रणनीति और एशिया में बदलते समीकरण

चीन लंबे समय से ‘इंडो-पैसिफिक’ की अवधारणा का विरोध करता रहा है और ‘एशिया-पैसिफिक’ शब्द को प्राथमिकता देता आया है। ऐसे में अमेरिकी कदम को कुछ विश्लेषक चीन के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहे हैं। हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की क्षेत्रीय मौजूदगी पूरी तरह खत्म होने वाली नहीं है, बल्कि उसकी रणनीति में प्राथमिकताओं का पुनर्संतुलन देखने को मिल सकता है।

भारत के सामने आत्मनिर्भर सुरक्षा की चुनौती

रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि वैश्विक समीकरण चाहे जैसे बदलें, भारत को अपनी सैन्य और रणनीतिक क्षमताओं को लगातार मजबूत करते रहना होगा। बदलते भू-राजनीतिक माहौल में आत्मनिर्भर रक्षा ढांचा और क्षेत्रीय साझेदारियों का विस्तार भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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