IIT जोधपुर की बड़ी उपलब्धि, अब पहले ही पता चलेगा कीमोथेरेपी असर करेगी या नहीं
कैंसर उपचार के क्षेत्र में नई उम्मीद
राजस्थान के जोधपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर के वैज्ञानिकों ने कैंसर उपचार को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। संस्थान के शोधकर्ताओं ने ऐसे नए बायोमार्कर्स विकसित किए हैं, जिनकी मदद से उपचार शुरू होने से पहले ही यह पता लगाया जा सकेगा कि किसी मरीज पर कीमोथेरेपी प्रभावी रहेगी या नहीं। यह खोज डॉक्टरों को मरीज की स्थिति के अनुसार सही दवा और उपचार रणनीति चुनने में मदद करेगी।
कैंसर मरीजों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह शोध
भारत में हर वर्ष लाखों लोग कैंसर की चपेट में आते हैं और बड़ी संख्या में मरीजों की मौत इस बीमारी के कारण होती है। आधुनिक उपचार पद्धतियां उपलब्ध होने के बावजूद कई मरीजों में कीमोथेरेपी के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है, जिससे इलाज का असर कम हो जाता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए IIT जोधपुर के बायोसाइंस एवं बायोइंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दिनेश कुमार अहिरवार के नेतृत्व में यह शोध किया जा रहा है।
अत्याधुनिक तकनीकों से हो रहा कैंसर कोशिकाओं का विश्लेषण
शोध दल सिंगल-सेल सीक्वेंसिंग, मल्टीकलर हाई-पैरामीटर फ्लो साइटोमेट्री, आधुनिक आणविक जीवविज्ञान तकनीकों और कम्प्यूटेशनल विश्लेषण का उपयोग कर रहा है। इन तकनीकों की मदद से ट्यूमर में मौजूद प्रत्येक कैंसर कोशिका का अलग-अलग अध्ययन किया जा रहा है। इससे उन कोशिकाओं की पहचान संभव हो रही है जो कीमोथेरेपी के बाद भी जीवित बच जाती हैं और भविष्य में कैंसर के दोबारा फैलने का कारण बनती हैं।
पुरानी दवाओं के नए उपयोग पर भी काम
शोधकर्ता केवल नई तकनीकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पहले से स्वीकृत दवाओं को कीमोथेरेपी के साथ उपयोग करने की संभावनाओं पर भी अध्ययन कर रहे हैं। इस प्रक्रिया को ड्रग रिपर्पजिंग कहा जाता है। इससे नई दवाओं के विकास में लगने वाला समय और लागत कम हो सकती है, जबकि मरीजों को बेहतर उपचार विकल्प मिल सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह रणनीति कैंसर उपचार को अधिक किफायती और प्रभावी बना सकती है।
भविष्य में अधिक सटीक होगा कैंसर उपचार
विशेषज्ञों के अनुसार यह शोध कैंसर उपचार को व्यक्तिगत और सटीक बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। नए बायोमार्कर्स की मदद से मरीजों को अनावश्यक उपचार से बचाया जा सकेगा और सही समय पर सही दवा का चयन संभव होगा। इससे उपचार की सफलता दर बढ़ने के साथ मरीजों के जीवित रहने की संभावना भी बेहतर हो सकती है।
अत्याधुनिक तकनीक से तैयार हो रहा नया रोडमैप
- सिंगल-सेल एनालिसिस से प्रत्येक कैंसर कोशिका का अलग अध्ययन।
- कीमोथेरेपी प्रतिरोध के लिए जिम्मेदार आणविक परिवर्तनों की पहचान।
- ड्रग रिपर्पजिंग के जरिए पुरानी दवाओं के नए उपयोग की खोज।
- ह्यूमनाइज्ड माउस मॉडल और लंग-ऑन-चिप तकनीक से परीक्षण।
- सिलिकोसिस जैसी अन्य बीमारियों के अध्ययन में भी तकनीक के उपयोग की संभावना।