दुबई की नौकरी छोड़ बनीं ‘टीचर दीदी’, झुंझुनूं की अनीता पूनिया को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान
झुंझुनूं जिले के चिड़ावा की समाजसेवी अनीता पूनिया, जिन्हें लोग प्यार से ‘टीचर दीदी’ के नाम से जानते हैं, शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित होने जा रही हैं। खानाबदोश और वंचित परिवारों के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देकर मुख्यधारा से जोड़ने वाली अनीता को जयपुर में आयोजित एक राष्ट्रीय स्तर के समारोह में ‘शिक्षा सेवा प्रवण पुरस्कार’ प्रदान किया जाएगा। उनका संघर्ष और समर्पण आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है।
दुबई से लौटकर बदली जीवन की दिशा
अनीता पूनिया का जीवन कभी विदेश की सुविधाओं और आरामदायक माहौल के बीच गुजर रहा था। दुबई में रहते हुए उनके पास बेहतर करियर और सुख-सुविधाओं से भरा जीवन था, लेकिन समाज के लिए कुछ करने की इच्छा हमेशा उनके मन में बनी रही। भारत लौटने के बाद जब उन्होंने चिड़ावा की सड़कों पर कचरा बीनते, भीख मांगते और शिक्षा से दूर बच्चों को देखा तो उनका मन व्यथित हो उठा। यही वह क्षण था जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने तय किया कि इन बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए खुद को समर्पित करेंगी।
‘सरला पाठशाला’ बन गई उम्मीद की नई किरण
समाज के सबसे जरूरतमंद बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के उद्देश्य से अनीता ने चिड़ावा के बाई रोड क्षेत्र में ‘सरला पाठशाला’ की शुरुआत की। इस पहल का मकसद उन बच्चों को शिक्षा से जोड़ना था, जो आर्थिक अभाव, खानाबदोश जीवनशैली या सामाजिक परिस्थितियों के कारण स्कूल नहीं जा पाते थे। शुरुआत में संसाधनों की कमी और सामाजिक चुनौतियां सामने आईं, लेकिन अनीता ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। धीरे-धीरे उनकी पाठशाला जरूरतमंद बच्चों के लिए उम्मीद का केंद्र बन गई और शिक्षा के जरिए उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगे।
मुफ्त शिक्षा के साथ किताबें, ड्रेस और संस्कार
अनीता पूनिया केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने बच्चों को निशुल्क किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई। साथ ही बच्चों के सर्वांगीण विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया। यहां पढ़ने वाले बच्चों को भाषा, गणित और विज्ञान जैसे विषयों के साथ नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारियों की भी शिक्षा दी जाती है। उनके प्रयासों से आज कई ऐसे बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं, जिनके लिए कभी स्कूल जाना भी एक सपना था।
97 बच्चों का भविष्य संवारने में जुटी हैं अनीता
लगातार मेहनत और समर्पण का परिणाम यह रहा कि आज सरला पाठशाला के माध्यम से करीब 97 बच्चे नियमित रूप से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। जिन परिवारों में कभी शिक्षा को महत्व नहीं दिया जाता था, वहां अब माता-पिता स्वयं बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। अनीता के कार्य ने न केवल बच्चों का जीवन बदला है, बल्कि पूरे समुदाय की सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन लाया है। यही कारण है कि क्षेत्र के लोग उन्हें सम्मान और स्नेह के साथ ‘टीचर दीदी’ कहकर पुकारते हैं।
जयपुर में मिलेगा प्रतिष्ठित ‘शिक्षा सेवा प्रवण पुरस्कार’
अनीता पूनिया को 18 जून को जयपुर स्थित राजस्थान विश्वविद्यालय में आयोजित ‘अखिल भारतीय संस्कृत विद्वत सम्मान एवं विशिष्ट व्याख्यान समारोह’ में ‘शिक्षा सेवा प्रवण पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। यह आयोजन संस्कृत विद्वान एवं राष्ट्रपति सम्मानित स्वर्गीय आचार्य पंडित बद्री प्रसाद शास्त्री की स्मृति में आयोजित किया जा रहा है। समारोह में शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया जाएगा। अनीता का चयन इस बात का प्रमाण है कि समाज के लिए निस्वार्थ भाव से किया गया कार्य हमेशा पहचान और सम्मान दिलाता है।