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जयपुर में अन्नपूर्णा रसोई योजना पर संकट, 8 केंद्र बंद, कई जगह समय से पहले खत्म हो रहा भोजन

गरीब और जरूरतमंद लोगों को मात्र 8 रुपए में भरपेट भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई अन्नपूर्णा रसोई योजना जयपुर में गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। राजधानी में कई रसोइयों पर ताले लटके हुए हैं, जबकि संचालित केंद्रों पर भी निर्धारित समय से पहले भोजन समाप्त हो जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कई केंद्रों पर लटके मिले ताले

शहर के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए निरीक्षण के दौरान कई अन्नपूर्णा रसोई केंद्र बंद पाए गए। स्थानीय लोगों के अनुसार खानिया, रामगढ़ मोड़ और रामगंज चौपड़ सहित कई स्थानों पर रसोइयां डेढ़ से ढाई महीने से बंद पड़ी हैं। भोजन की उम्मीद में आने वाले लोग ताला लगा देखकर निराश होकर लौटने को मजबूर हैं।

जरूरतमंदों पर पड़ रहा सीधा असर

अन्नपूर्णा रसोई योजना का सबसे अधिक लाभ मजदूरों, रिक्शा चालकों, फुटपाथ व्यापारियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को मिलता है। रसोइयों के बंद होने से इन लोगों को सस्ते भोजन की सुविधा नहीं मिल पा रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रोजाना कई लोग रसोई खुलने की जानकारी लेने आते हैं, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता।

संचालित रसोइयों में भी भोजन की कमी

जहां रसोइयां संचालित हो रही हैं, वहां भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। ईदगाह स्थित अन्नपूर्णा रसोई में दोपहर डेढ़ बजे तक भोजन समाप्त हो चुका था। वहां न रोटियां उपलब्ध थीं और न ही चावल। कर्मचारियों का कहना है कि भोजन की मांग अधिक होने के कारण खाना जल्दी खत्म हो जाता है।

कूपन गड़बड़ी के बाद हुई कार्रवाई

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार कुछ रसोइयों का संचालन करने वाली संस्था के खिलाफ लाभार्थियों के कूपन में अनियमितता की शिकायतें मिली थीं। जांच के बाद संबंधित संस्था को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इन केंद्रों के संचालन की जिम्मेदारी अब नई संस्था को देने की प्रक्रिया चल रही है।

हर साल करोड़ों का खर्च

नगर निगम के अनुसार जयपुर में वर्तमान में 63 अन्नपूर्णा रसोइयां संचालित हैं और इस योजना पर हर वर्ष करीब 6 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। बावजूद इसके कई केंद्रों के बंद होने और भोजन वितरण में आ रही समस्याओं ने योजना की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जल्द बहाल करने की तैयारी

अधिकारियों का दावा है कि बंद पड़ी रसोइयों को जल्द ही नए संचालकों के माध्यम से शुरू किया जाएगा। साथ ही भोजन वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने और जरूरतमंद लोगों को नियमित सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

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