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नीमच की टीम यंगिस्तान बनी हजारों लोगों के लिए ‘जीवनरेखा’

मध्यप्रदेश के नीमच जिले में एक ऐसी सामाजिक पहल चल रही है, जिसने अब तक हजारों जिंदगियों को नया जीवन दिया है। रक्तदाता क्लब (टीम यंगिस्तान) पिछले 12 वर्षों से रक्तदान और जरूरतमंद मरीजों तक समय पर रक्त पहुंचाने के कार्य में लगातार सक्रिय है। यह समूह अब सिर्फ जिले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई राज्यों में भी जरूरत पड़ने पर रक्त उपलब्ध करा रहा है।

2014 में एक अनुभव से शुरू हुई मुहिम

इस संस्था की शुरुआत एक व्यक्तिगत और भावनात्मक अनुभव से हुई थी। संस्थापक राकेश खीची के अनुसार, परिवार में एक सदस्य के ऑपरेशन के दौरान रक्त की आवश्यकता ने यह एहसास कराया कि समय पर रक्त मिलना कितना मुश्किल हो सकता है। इसी अनुभव ने समाज में रक्तदान को लेकर जागरूकता फैलाने और लोगों की मदद करने का संकल्प दिलाया। आज यही छोटी सी पहल एक बड़े सामाजिक आंदोलन में बदल चुकी है।

8 हजार से अधिक मरीजों को मिला सहारा

टीम यंगिस्तान अब तक करीब 8 हजार से अधिक जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में सहयोग कर चुकी है। संस्था से जुड़े 2 हजार से ज्यादा नियमित रक्तदाता ‘रक्तवीर’ किसी भी सूचना या फोन कॉल पर तुरंत मदद के लिए तैयार रहते हैं। यह नेटवर्क इमरजेंसी में मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बन जाता है।

कई राज्यों तक फैला नेटवर्क

संस्था की सेवाएं अब नीमच, मंदसौर, इंदौर और उदयपुर तक सीमित नहीं हैं। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में भी जरूरत पड़ने पर रक्त उपलब्ध कराया गया है। आपात परिस्थितियों में दूर-दराज इलाकों में भी रक्तदाताओं को जोड़कर मरीजों की जान बचाई गई है।

थैलेसीमिया मरीजों के लिए खास सहारा

संस्था का कहना है कि थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए नियमित रक्त सबसे जरूरी है। ऐसे बच्चों को हर 15–20 दिन में रक्त की आवश्यकता होती है। रक्तदाता क्लब द्वारा आयोजित शिविरों से मिलने वाला रक्त इन बच्चों के लिए जीवनरेखा साबित होता है। संस्था का मानना है कि एक स्वस्थ व्यक्ति साल में कई बार सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकता है।

युवाओं को जोड़ने की पहल

नई पीढ़ी को रक्तदान से जोड़ने के लिए “टीम यंगिस्तान” का गठन किया गया है। विशेष शिविरों के माध्यम से अब तक 100 से अधिक युवाओं ने अपना पहला रक्तदान किया है, जिनमें कई अब नियमित रक्तदाता बन चुके हैं। संस्था लगातार युवाओं को इस सेवा कार्य से जोड़ने का प्रयास कर रही है।

संदेश: रक्तदान ही सच्चा जीवनदान

संस्था के संस्थापक राकेश खीची का कहना है कि रक्त का कोई विकल्प नहीं है, इसे केवल इंसान ही दे सकता है। इसलिए रक्तदान सिर्फ दान नहीं, बल्कि जीवनदान है। उनका मानना है कि समाज में अभी भी जागरूकता की कमी है, जिसे दूर करने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।

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