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ITR फाइलिंग गाइड: इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय इन 7 गलतियों से बचें

असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। टैक्सपेयर्स के लिए ITR फाइलिंग बेहद जरूरी वित्तीय जिम्मेदारी है, लेकिन छोटी सी गलती भी बड़ा नुकसान करा सकती है। गलत फॉर्म चयन, डेटा मिसमैच या गलत क्लेम जैसी भूलों के कारण नोटिस, जुर्माना या टैक्स छूट खत्म होने की स्थिति बन सकती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, सही जानकारी और सावधानी के साथ ITR भरना जरूरी है।

सही ITR फॉर्म का चयन सबसे जरूरी कदम

ITR फाइलिंग की शुरुआत सही फॉर्म चुनने से होती है। भारत में ITR-1 से ITR-7 तक अलग-अलग फॉर्म उपलब्ध हैं, जो आय के स्रोत और करदाता की स्थिति पर निर्भर करते हैं। गलत फॉर्म चुनने पर रिटर्न रिजेक्ट भी हो सकता है या बाद में संशोधन करना पड़ सकता है। इसलिए फाइलिंग से पहले अपनी इनकम कैटेगरी को समझकर सही फॉर्म का चयन करना बेहद जरूरी है।

AIS, 26AS और फॉर्म 16 का सही मिलान करें

ITR भरते समय Annual Information Statement (AIS), Form 26AS और Form 16 में दर्ज जानकारी को अपने रिकॉर्ड से मिलाना जरूरी है। अगर किसी भी तरह का मिसमैच या गलती होती है, तो उसे तुरंत सुधारना चाहिए। डेटा में अंतर होने पर टैक्स नोटिस या जांच की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए हर एंट्री को सावधानी से वेरिफाई करना जरूरी है।

सभी आय सही हेड में दिखाना जरूरी

टैक्सपेयर्स को अपनी सभी कर योग्य आय सही तरीके से रिपोर्ट करनी चाहिए। कई बार प्री-फिल्ड डेटा पर पूरी तरह निर्भर रहना गलत साबित हो सकता है। इनकम को सही हेड जैसे सैलरी, बिजनेस, कैपिटल गेन या अन्य स्रोत में दर्ज करना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी तरह की गड़बड़ी या विवाद न हो।

छूट और टैक्स-फ्री आय की सही जानकारी दें

ITR फाइलिंग में टैक्स-फ्री आय जैसे ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट या अन्य छूट प्राप्त रकम को भी सही तरीके से दिखाना जरूरी है। इसके अलावा सभी डिडक्शन केवल तभी क्लेम करें जब आप इसके लिए पात्र हों और आपके पास आवश्यक दस्तावेज मौजूद हों। गलत क्लेम करने पर पेनल्टी और अतिरिक्त टैक्स लग सकता है।

बैंक डिटेल और रिफंड जानकारी अपडेट रखें

रिटर्न दाखिल करने से पहले बैंक अकाउंट की जानकारी सही और वेरिफाइड होनी चाहिए, खासकर अगर रिफंड मिलने की संभावना है। गलत बैंक डिटेल होने पर रिफंड अटक सकता है या देरी हो सकती है। सभी वित्तीय जानकारी को एक बार दोबारा जांचना सुरक्षित माना जाता है।

समय पर फाइलिंग और वेरिफिकेशन जरूरी

ITR फाइल करने के बाद उसका वेरिफिकेशन 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य है। यदि वेरिफिकेशन नहीं किया गया तो रिटर्न को अमान्य माना जा सकता है। इसलिए फाइलिंग के बाद समय पर ई-वेरिफिकेशन पूरा करना बेहद जरूरी है, ताकि ITR वैध माना जाए और किसी तरह की समस्या न हो।

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