#क्राइम #मनोरंजन #राज्य-शहर

त्विषा शर्मा केस में नए सवाल: हेडफोन बरामदगी, रस्सी के रिकॉर्ड और शुरुआती जांच पर उठे संदेह

मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए सवाल सामने आते जा रहे हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अब केवल मौत की परिस्थितियों की ही नहीं, बल्कि शुरुआती पुलिस जांच की प्रक्रिया और सबूतों की हैंडलिंग की भी पड़ताल कर रही है। हेडफोन की बरामदगी में कथित देरी, फंदे से जुड़ी सामग्री के जब्ती रिकॉर्ड और केस दस्तावेजों तक पहुंच को लेकर उठे सवालों ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

शुरुआती जांच और जब्ती रिकॉर्ड पर उठे सवाल

त्विषा शर्मा 12 मई 2026 को भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने जांच शुरू की थी, लेकिन बाद में मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। अब परिवार की ओर से शुरुआती जांच में कथित खामियों की ओर इशारा किया जा रहा है। परिवार के वकील का दावा है कि घटनास्थल से बरामद कथित फंदे या रस्सी की जब्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों में महत्वपूर्ण जानकारियों का अभाव है। उनका कहना है कि रिकॉर्ड में यह स्पष्ट नहीं है कि बरामद सामग्री को फंदे के रूप में किसने चिन्हित किया था, जिससे जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

रस्सी की बरामदगी और फॉरेंसिक प्रक्रिया पर बहस

परिवार की ओर से आरोप लगाया गया है कि घटनास्थल से जब्त की गई कथित लिगेचर सामग्री को तत्काल परीक्षण के लिए नहीं भेजा गया। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीम ने मौके का निरीक्षण कर सामग्री की पहचान की थी और नियमानुसार उसे जब्त किया गया। अब सीबीआई यह जानने की कोशिश कर रही है कि सबूतों की जब्ती और संरक्षण की प्रक्रिया पूरी तरह मानकों के अनुरूप थी या नहीं। जांच एजेंसी के लिए यह पहलू महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि किसी भी आपराधिक जांच में भौतिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता निर्णायक भूमिका निभाती है।

हेडफोन की बरामदगी में देरी ने बढ़ाए सवाल

मामले में एक और महत्वपूर्ण बिंदु हेडफोन की बरामदगी को लेकर सामने आया है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार सीसीटीवी फुटेज में त्विषा को हेडफोन पहने हुए देखा गया था, लेकिन यह हेडफोन कथित तौर पर घटना के करीब दस दिन बाद बरामद किया गया। परिवार का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की बरामदगी में हुई देरी की जांच आवश्यक है। हालांकि पुलिस का दावा है कि इस देरी से जांच की दिशा या निष्कर्ष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। सीबीआई अब इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला का विश्लेषण कर रही है।

मेडिकल रिकॉर्ड और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े दावों की जांच

मामले में मेडिकल रिकॉर्ड भी जांच के केंद्र में हैं। बचाव पक्ष की ओर से पहले दावा किया गया था कि त्विषा मानसिक तनाव और मनोवैज्ञानिक समस्याओं से जूझ रही थीं तथा उनका उपचार चल रहा था। इसी संदर्भ में सीबीआई ने संबंधित मनोचिकित्सक से पूछताछ की है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उपचार वास्तव में हुआ था या नहीं और यदि हुआ था तो उसकी प्रकृति क्या थी। डॉक्टर ने पूछताछ की पुष्टि की है, लेकिन मरीज की गोपनीयता का हवाला देते हुए विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

सीबीआई की जांच कई पहलुओं पर केंद्रित

वर्तमान में सीबीआई घटनास्थल से जुड़े भौतिक साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड, मेडिकल दस्तावेजों और शुरुआती पुलिस जांच की प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा कर रही है। परिवार की ओर से उठाए गए सवालों में फंदे की सामग्री की पहचान, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जब्ती और केस दस्तावेजों तक कथित पहुंच जैसे मुद्दे शामिल हैं। दूसरी ओर बचाव पक्ष सभी आरोपों को खारिज करता रहा है। अब जांच एजेंसी की रिपोर्ट और फॉरेंसिक विश्लेषण के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *