होर्मुज स्ट्रेट में बड़ा हादसा: अमेरिकी हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत
ओमान तट के पास होर्मुज स्ट्रेट में एक वाणिज्यिक जहाज पर अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई ने बड़ा अंतरराष्ट्रीय विवाद खड़ा कर दिया है। पलाऊ ध्वज वाले इस जहाज पर मौजूद भारतीय क्रू मेंबर्स में से 3 की मौत हो गई, जबकि कई लोगों को सुरक्षित बचाया गया। अमेरिका का दावा है कि जहाज प्रतिबंधित ईरानी तेल ले जा रहा था और चेतावनियों को नजरअंदाज कर रहा था, जबकि इस घटना पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
होर्मुज के पास तनाव: क्यों हुआ अमेरिकी हमला?
अमेरिकी नौसेना के अनुसार, यह जहाज होर्मुज स्ट्रेट में लगाए गए निगरानी और नाकेबंदी नियमों का उल्लंघन कर रहा था। आरोप है कि जहाज पर ईरान से जुड़े प्रतिबंधित तेल की ढुलाई की जा रही थी। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि कई बार चेतावनी देने के बावजूद जहाज ने रुकने से इनकार किया, जिसके बाद स्थिति को “सुरक्षा खतरा” मानते हुए कार्रवाई की गई। इसी दौरान जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाया गया, जिससे बड़ा हादसा हो गया।
कैसे हुई कार्रवाई: सटीक हथियारों से टारगेटिंग
जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी नेवी ने पहले जहाज को रुकने का संकेत दिया, लेकिन जब आदेशों का पालन नहीं हुआ तो सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों का इस्तेमाल किया गया। हमला सीधे जहाज के इंजन सेक्शन पर किया गया, जिससे जहाज को गंभीर नुकसान पहुंचा। अचानक हुई इस कार्रवाई के कारण कई क्रू मेंबर्स की जान खतरे में पड़ गई और स्थिति नियंत्रित करने में समय लग गया।
भारतीय नाविकों की मौत और रेस्क्यू ऑपरेशन
इस घटना में तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मृतकों में डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश शामिल हैं। जहाज पर मौजूद 21 अन्य क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचा लिया गया। घटना के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और अमेरिकी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब किया।
क्या अमेरिका को भारतीय क्रू की जानकारी थी? उठे सवाल
फेडरेशन ऑफ शिपिंग यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) के अनुसार, अमेरिकी नेवी को पहले से जानकारी थी कि जहाज पर भारतीय और अन्य विदेशी नाविक मौजूद हैं। संगठन का कहना है कि अगर जहाज संदिग्ध था तो उसे हिरासत में लिया जा सकता था, बजाय सीधे हमले के। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सवाल और गहरा गया है कि क्या कार्रवाई में मानवीय पहलू की अनदेखी की गई।
सरकारी प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बचे हुए क्रू की सुरक्षित वापसी और मृतकों के शव भारत लाने की प्रक्रिया तेज की जाए। भारत सरकार इस पूरे मामले में अमेरिका से जवाब भी मांग सकती है।