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Gold Price Today: कच्चे तेल में तेजी के बीच टूटा सोना, जानिए 24, 22 और 18 कैरेट गोल्ड के ताजा रेट

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सर्राफा बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जबकि सोने के भाव में गिरावट दर्ज की गई है। घरेलू हाजिर और वायदा बाजार दोनों में गुरुवार को सोना लाल निशान में कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं चांदी के दाम अपेक्षाकृत स्थिर बने हुए हैं।

दिल्ली में 24, 22 और 18 कैरेट सोना हुआ सस्ता

ताजा आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव 2,130 रुपये घटकर 1,45,790 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत 1,950 रुपये की गिरावट के साथ 1,33,650 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। 18 कैरेट गोल्ड का रेट भी 1,600 रुपये टूटकर 1,09,380 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। दूसरी ओर, चांदी का हाजिर भाव 2.50 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बना हुआ है।

मिडिल ईस्ट तनाव और महंगे कच्चे तेल का पड़ा असर

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। बढ़ती अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की तेजी देखी गई है। इससे वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है। बाजार जानकारों का मानना है कि अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है तो निवेशक सोने जैसे गैर-ब्याज वाले एसेट्स से निकलकर बॉन्ड जैसे विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे सोने पर दबाव बढ़ सकता है।

एमसीएक्स पर भी कमजोरी के साथ कारोबार

घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर भी सोने और चांदी दोनों में गिरावट देखने को मिली। सोने का वायदा भाव करीब 681 रुपये टूटकर 1,47,336 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं चांदी का वायदा भाव 1,705 रुपये की गिरावट के साथ 2,33,800 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। इससे साफ है कि वैश्विक संकेतों का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिला-जुला रुख

वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में मिश्रित रुझान देखने को मिला। कॉमेक्स पर सोने की कीमत में गिरावट दर्ज की गई, जबकि स्पॉट गोल्ड में मामूली बढ़त रही। इसी तरह चांदी के कॉमेक्स भाव में कमजोरी दिखी, लेकिन स्पॉट सिल्वर में हल्की मजबूती देखने को मिली। निवेशकों की नजर अब आगामी वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर बनी हुई है।

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