अलवर में 12 जून को डीएनटी समाज का महाजुटान, 11 मांगों को लेकर जेल भरो आंदोलन का ऐलान
अलवर में 12 जून को घुमंतु, अर्द्ध घुमंतु एवं विमुक्त (डीएनटी) समाज अपनी लंबित मांगों को लेकर बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने जा रहा है। कटी घाटी स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर के पास आयोजित होने वाले ‘जेल भरो आंदोलन’ में प्रदेशभर से हजारों लोगों के जुटने की संभावना है। समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा। इस कार्यक्रम को डीएनटी समुदाय के अधिकार, पहचान और सामाजिक न्याय की लड़ाई का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
12 जून को होगा विशाल जेल भरो आंदोलन
राष्ट्रीय पशुपालक संघ और डीएनटी संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह आंदोलन अलवर में समाज की सबसे बड़ी सभाओं में से एक माना जा रहा है। आयोजकों के अनुसार प्रदेश के विभिन्न जिलों से 5 से 7 हजार लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्षों से लंबित समस्याओं और मांगों को लेकर कई बार सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। ऐसे में अब समुदाय ने लोकतांत्रिक तरीके से बड़ा जनआंदोलन खड़ा करने का निर्णय लिया है। इस आंदोलन का उद्देश्य सरकार तक समाज की आवाज को मजबूती से पहुंचाना है।
32 जातियों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना
आंदोलन में डीएनटी वर्ग की करीब 32 जातियों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। इनमें जोगी, रैबारी, कालबेलिया, नायक, भोपा, बंजारा, गाडिया लोहार, बावरी, कंजर, सांसी, मोगिया, नट, भाट और सिकलीगर समेत कई समुदाय शामिल हैं। आयोजकों का कहना है कि यह सिर्फ किसी एक जाति का आंदोलन नहीं बल्कि पूरे डीएनटी समाज के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई है। बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और समाज के वरिष्ठ लोगों के भी कार्यक्रम में भाग लेने की उम्मीद है, जिससे यह आयोजन प्रदेशस्तरीय स्वरूप ले सकता है।
सभा के बाद सरकार को सौंपा जाएगा ज्ञापन
कार्यक्रम के तहत सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक विशाल सभा आयोजित की जाएगी। इस दौरान राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर के नेता समाज की समस्याओं, सरकारी योजनाओं में हिस्सेदारी, शिक्षा, रोजगार और पहचान से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे। सभा समाप्त होने के बाद जिला कलेक्टर के माध्यम से राज्य सरकार को 11 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा जाएगा। समाज के नेताओं का कहना है कि ज्ञापन में उन प्रमुख मांगों को शामिल किया गया है, जिनका सीधा संबंध डीएनटी समुदाय के सामाजिक और आर्थिक विकास से है।
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा और तेज
आयोजकों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को आगामी दिनों में और व्यापक रूप दिया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराने की भी घोषणा की गई है। राष्ट्रीय पशुपालक संघ और डीएनटी संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने समाज के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है। उनका कहना है कि यह संघर्ष समाज के भविष्य और अधिकारों से जुड़ा हुआ है, इसलिए सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है।