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जयपुर अग्निकांड का मुख्य आरोपी फिरोज फरार, 8 मौतों के बाद पुलिस ने तेज की तलाश

जयपुर के खोह नागोरियान इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद पुलिस जांच में लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इस हादसे में आठ लोगों की मौत के बाद मुख्य आरोपी फिरोज पुलिस की पकड़ से बाहर है। जांच एजेंसियों का दावा है कि रिहायशी इलाके में अवैध रूप से बारूद और आतिशबाजी सामग्री का कारोबार संचालित किया जा रहा था। हादसे के बाद आरोपी सहित कई अन्य लोग फरार हैं, जबकि पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमों को सक्रिय कर दिया है।

दिल्ली से जयपुर तक फैला था अवैध नेटवर्क

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी फिरोज और उसके सहयोगी आतिशबाजी सामग्री के अवैध कारोबार से जुड़े हुए थे। सूत्रों के अनुसार दिल्ली में कार्रवाई और निगरानी बढ़ने के बाद आरोपियों ने अपनी गतिविधियों का केंद्र जयपुर को बना लिया। बताया जा रहा है कि करीब छह वर्ष पहले किराए पर लिए गए मकान में बारूद और पटाखा सामग्री की पैकिंग तथा भंडारण का काम चल रहा था। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं और अवैध कारोबार का दायरा कितना बड़ा था।

कई अवैध इकाइयों के संचालन का संदेह

पुलिस को आशंका है कि खोह नागोरियान और आसपास के क्षेत्रों में एक से अधिक स्थानों पर इसी तरह की गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। शुरुआती जांच में तीन से चार संदिग्ध इकाइयों की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों का मानना है कि दिल्ली से कच्चा माल लाकर स्थानीय स्तर पर उसकी पैकिंग और तैयार माल का वितरण किया जाता था। जांच टीम वित्तीय लेन-देन, किरायेदारी रिकॉर्ड और स्थानीय संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

आग लगने के कारणों की हो रही वैज्ञानिक जांच

विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की टीम घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है। फिलहाल आग लगने के कारणों को लेकर कई संभावनाओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार किसी प्रकार की चिंगारी, लापरवाही या सुरक्षा मानकों की अनदेखी हादसे की वजह हो सकती है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष एफएसएल रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा। पुलिस का कहना है कि सभी तकनीकी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।

पुलिस को जांच में सहयोग नहीं मिलने की चुनौती

जांच अधिकारियों के सामने एक बड़ी चुनौती स्थानीय स्तर पर सीमित सहयोग भी है। पुलिस का कहना है कि कई महत्वपूर्ण जानकारियां अभी तक सामने नहीं आ सकी हैं क्योंकि लोग खुलकर बयान देने से बच रहे हैं। दूसरी ओर, मकान मालिक और उससे जुड़े कुछ लोग भी घटना के बाद से संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि परिसर में चल रही गतिविधियों की उन्हें कितनी जानकारी थी।

प्रशासन ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

हादसे के बाद जिला प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। जिस क्षेत्र में यह घटना हुई, वहां की भूमि स्थिति, निर्माण की वैधता और स्थानीय प्रशासनिक निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन यह जांच कर रहा है कि क्षेत्र में संचालित गतिविधियां नियमों के अनुरूप थीं या नहीं। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

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