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18 साल बाद खुला रहस्य: मृत समझी गई युवती कनाडा में मिली जिंदा, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

पंजाब से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां जिस युवती को परिवार वर्षों से लापता और संभवतः मृत मान रहा था, वह कनाडा में जीवित पाई गई। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही थी और हत्या की आशंका जताई जा रही थी। लेकिन पासपोर्ट रिकॉर्ड, इमिग्रेशन दस्तावेज, वीडियो कॉल और पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों ने पूरी कहानी बदल दी। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट कर दिया कि युवती जीवित है और हत्या की आशंका को साबित करने वाला कोई ठोस प्रमाण मौजूद नहीं है।

लापता होने के बाद हत्या की आशंका तक पहुंचा मामला

याचिकाकर्ता आत्मा सिंह ने अदालत में दावा किया था कि उनकी भांजी देविंदर कौर कई वर्षों से लापता है और उसकी संभावित हत्या की जांच नहीं की गई। उनके अनुसार उनकी बहन हरपाल कौर भी रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गई थीं, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया। परिवार को आशंका थी कि दोनों घटनाओं के पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। इसी आधार पर अदालत से विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और मामले की गहन जांच कराने की मांग की गई थी। मामला लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया में बना रहा।

पुलिस जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कई तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए। जांच में पता चला कि देविंदर कौर वर्ष 2013 में भारत छोड़कर विदेश चली गई थी। बाद में उसके यात्रा रिकॉर्ड, पासपोर्ट और इमिग्रेशन संबंधी दस्तावेजों की जांच की गई। अधिकारियों ने जनवरी 2025 में उससे वीडियो कॉल पर भी बातचीत की। इस दौरान उसके रिश्तेदारों ने उसकी पहचान की पुष्टि की। पुलिस ने वीडियो कॉल की रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेजों को जांच का हिस्सा बनाया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि युवती जीवित है और विदेश में रह रही है।

पासपोर्ट और इमिग्रेशन रिकॉर्ड बने अहम सबूत

जांच एजेंसियों को मिले रिकॉर्ड के अनुसार देविंदर कौर को भारतीय पासपोर्ट जारी किया गया था, जिसका बाद में कनाडा के वैंकूवर में नवीनीकरण भी कराया गया। इमिग्रेशन दस्तावेजों से यह भी सामने आया कि वह 26 जनवरी 2013 को भारत से बाहर गई थी। इसके बाद वह विभिन्न अवसरों पर भारत आई और फिर कनाडा लौट गई। इन आधिकारिक रिकॉर्ड्स ने अदालत के सामने यह साबित कर दिया कि युवती की पहचान, यात्रा और निवास संबंधी जानकारी पूरी तरह प्रमाणित है। यही दस्तावेज मामले में सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य बने।

हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज

मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य यह साबित करते हैं कि देविंदर कौर जीवित है। अदालत ने यह भी माना कि पुलिस जांच में किसी प्रकार की गंभीर लापरवाही या हत्या के संकेत नहीं मिले हैं। इसलिए हत्या का मामला दर्ज करने या विशेष जांच दल गठित करने का कोई औचित्य नहीं बनता। अदालत ने याचिकाकर्ता की मांगों को अस्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। फैसले के साथ वर्षों पुराना यह रहस्य भी समाप्त हो गया।

परिवार के लिए राहत और हैरानी का मिश्रण

इस घटनाक्रम ने परिवार और स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया। जिस युवती को वर्षों से लापता मानकर उसकी तलाश और कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही थी, उसके जीवित मिलने से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। अदालत के फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया कि मामला किसी अपराध का नहीं बल्कि लंबे समय तक संपर्क टूट जाने का था। हालांकि इस दौरान परिवार ने जो मानसिक और भावनात्मक संघर्ष झेला, वह इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू बनकर सामने आया।

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