रणथंभौर में अब हाईटेक निगरानी: सैटेलाइट कॉलर और GSM कैमरों से ट्रैक होंगे बाघ, हर मूवमेंट पर रहेगी नजर
राजस्थान के प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों की निगरानी अब आधुनिक तकनीक के जरिए की जाएगी। वन विभाग ने बाघों की लाइव ट्रैकिंग और बेहतर मॉनिटरिंग के लिए नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) से अनुमति मांगी है। मंजूरी मिलने के बाद बाघों पर सैटेलाइट कॉलर लगाए जाएंगे और जंगल में सोलर पावर्ड GSM कैमरे स्थापित किए जाएंगे, जिससे वन अधिकारियों को बाघों की गतिविधियों की पल-पल जानकारी मिल सकेगी।
बढ़ती बाघ संख्या ने बढ़ाई निगरानी की जरूरत
रणथंभौर टाइगर रिजर्व को देश में बाघों की प्रमुख नर्सरी माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में यहां बाघों की संख्या लगातार बढ़ी है। बढ़ती आबादी के कारण कई बाघ अपनी नई टेरिटरी की तलाश में रिजर्व क्षेत्र से बाहर निकल जाते हैं। ऐसे मामलों में उनकी सटीक लोकेशन और गतिविधियों पर नजर रखना वन विभाग के लिए चुनौती बन जाता है। इसी समस्या के समाधान के लिए अब आधुनिक तकनीक अपनाने की तैयारी की जा रही है।
8 से 10 बाघों पर लगाए जाएंगे सैटेलाइट कॉलर
रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह के अनुसार, NTCA की मंजूरी मिलने के बाद शुरुआती चरण में 8 से 10 बाघों पर सैटेलाइट कॉलर लगाए जाएंगे। इन कॉलरों के माध्यम से बाघों की लोकेशन और मूवमेंट की रियल टाइम जानकारी प्राप्त होगी। इससे जंगल से बाहर निकलने वाले बाघों की ट्रैकिंग आसान होगी और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को भी कम करने में मदद मिलेगी।
GSM कैमरों से मिलेगी लाइव निगरानी
वन विभाग रणथंभौर में आधुनिक GSM कैमरे भी स्थापित करने की योजना बना रहा है। ये कैमरे पारंपरिक इंटरनेट या वाई-फाई की बजाय सिम कार्ड आधारित तकनीक पर काम करेंगे। कैमरों से प्राप्त तस्वीरें और वीडियो सीधे अधिकारियों के मोबाइल फोन तक पहुंच सकेंगे। इससे जंगल के विभिन्न हिस्सों में मौजूद वन्यजीवों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।
सौर ऊर्जा से संचालित होंगे कैमरे
प्रस्तावित GSM कैमरे सौर ऊर्जा आधारित होंगे। इनमें लगी रिचार्जेबल बैटरियां सोलर पैनल के जरिए चार्ज होती रहेंगी, जिससे दूरस्थ जंगल क्षेत्रों में भी लगातार निगरानी संभव होगी। ये कैमरे दिन के साथ-साथ रात में भी उच्च गुणवत्ता की रिकॉर्डिंग करने में सक्षम होंगे। वन अधिकारी मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से इनकी लाइव फुटेज देख सकेंगे।
पुराने सर्विलांस सिस्टम को भी किया जाएगा अपग्रेड
रणथंभौर में पहले से लगे थर्मल कैमरों और सर्विलांस सिस्टम को भी आधुनिक बनाया जाएगा। वन विभाग का मानना है कि सैटेलाइट कॉलर, GSM कैमरे और अपग्रेडेड थर्मल सर्विलांस सिस्टम मिलकर बाघों की सुरक्षा और निगरानी को और मजबूत करेंगे। इससे वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ बाघों की गतिविधियों का वैज्ञानिक अध्ययन भी आसान हो सकेगा।