दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा पर दुनिया की नजर, चीन के गाओकाओ में 1.29 करोड़ छात्र शामिल
भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर बहस के बीच चीन में दुनिया की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा ‘गाओकाओ’ आयोजित की जा रही है। इस परीक्षा में इस वर्ष 1.29 करोड़ से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया है। गाओकाओ को चीन की उच्च शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर छात्रों को देश की प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश मिलता है। परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए चीन ने सुरक्षा और निगरानी के बेहद सख्त इंतजाम किए हैं।
क्या है गाओकाओ और क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
गाओकाओ, चीन की राष्ट्रीय कॉलेज प्रवेश परीक्षा है, जो हाईस्कूल शिक्षा पूरी करने वाले छात्रों के लिए आयोजित की जाती है। इस परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर छात्रों को विश्वविद्यालयों और विभिन्न स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश मिलता है। चीन में इसे केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि करियर और भविष्य तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। हर साल लाखों परिवारों की उम्मीदें इस परीक्षा से जुड़ी होती हैं, इसलिए इसकी तैयारी और आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर बेहद गंभीरता से लिया जाता है।
नकल रोकने के लिए हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था
गाओकाओ परीक्षा को सुरक्षित बनाने के लिए चीन ने अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। परीक्षा केंद्रों पर एआई आधारित निगरानी प्रणाली, स्मार्ट सुरक्षा गेट, फेसियल रिकग्निशन तकनीक और ड्रोन मॉनिटरिंग का उपयोग किया जा रहा है। छात्रों को मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, स्मार्ट ग्लास और अन्य वायरलेस उपकरण परीक्षा केंद्र में ले जाने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा छिपे हुए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का पता लगाने के लिए विशेष स्कैनिंग तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जाता है।
क्या गाओकाओ पूरी तरह से लीक-प्रूफ है?
हालांकि चीन की परीक्षा व्यवस्था को दुनिया की सबसे सख्त प्रणालियों में गिना जाता है, लेकिन इसे पूरी तरह त्रुटिरहित नहीं कहा जा सकता। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा में नकल, प्रश्नपत्र से जुड़ी अनियमितताओं और फर्जी अभ्यर्थियों के मामलों में हजारों लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इससे स्पष्ट होता है कि कड़े सुरक्षा उपायों के बावजूद परीक्षा प्रणाली को चुनौती देने की कोशिशें समय-समय पर सामने आती रहती हैं।
नकल पर सख्त सजा का प्रावधान
चीन में परीक्षा संबंधी अपराधों को गंभीर अपराध माना जाता है। संगठित नकल, प्रश्नपत्र या उत्तर लीक करने, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए धोखाधड़ी करने अथवा किसी अन्य व्यक्ति की जगह परीक्षा देने जैसे मामलों में कई वर्षों तक कारावास की सजा दी जा सकती है। इसके अलावा दोषी छात्रों पर भविष्य की सरकारी परीक्षाओं में शामिल होने पर प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कठोर कानून और तकनीकी निगरानी के संयुक्त प्रभाव से परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद मिलती है।