नटराज एजेंसी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी का खेल, रामगढ़ पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार
ऑनलाइन एजेंसी दिलाने के नाम पर लोगों को ठगने वाले एक कथित साइबर अपराधी को रामगढ़ थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन जारी कर लोगों को नटराज पेन-पेंसिल की एजेंसी दिलाने का भरोसा देता था और विभिन्न शुल्कों के नाम पर उनसे रकम वसूलता था। पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपी के पास से मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए गए हैं, जिनसे साइबर ठगी से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है। मामले की जांच जारी है और पुलिस इस नेटवर्क के अन्य संभावित कड़ियों की भी तलाश कर रही है।
गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई
रामगढ़ थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि खानपुर गांव में रहने वाला एक व्यक्ति सोशल मीडिया के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बना रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने विशेष टीम का गठन किया और निगरानी शुरू की। जांच के बाद पुलिस टीम ने गांव में दबिश देकर संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल कर लोगों को एजेंसी दिलाने का झांसा दे रहा था। पुलिस का कहना है कि आरोपी की गतिविधियों पर कुछ समय से नजर रखी जा रही थी और पर्याप्त जानकारी मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई।
सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापनों का जाल
जांच में सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नटराज पेन-पेंसिल की एजेंसी उपलब्ध कराने संबंधी विज्ञापन प्रसारित करता था। विज्ञापन देखने के बाद जब लोग उससे संपर्क करते, तो वह खुद को अधिकृत प्रतिनिधि बताकर भरोसा जीतने की कोशिश करता। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग शुल्क और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर रकम जमा करवाता था। पीड़ितों को एजेंसी मिलने का भरोसा दिया जाता, लेकिन भुगतान के बाद उन्हें कोई वैध दस्तावेज या एजेंसी नहीं मिलती थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस तरीके से कितने लोग ठगी का शिकार हुए हैं।
मोबाइल और सिम से मिले अहम डिजिटल साक्ष्य
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किया। प्रारंभिक तकनीकी जांच में मोबाइल से कई डिजिटल साक्ष्य मिलने की जानकारी सामने आई है। इनमें सोशल मीडिया अकाउंट, संदिग्ध संदेश, ऑनलाइन लेन-देन और संभावित पीड़ितों से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है। पुलिस अब मोबाइल डेटा की फोरेंसिक जांच करवा रही है, ताकि ठगी के पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। साथ ही बैंक खातों और डिजिटल भुगतान माध्यमों की भी जांच की जा रही है, जिससे आर्थिक लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड सामने आ सके।
नेटवर्क और पीड़ितों की संख्या खंगाल रही पुलिस
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस ठगी में अन्य लोग भी शामिल थे या आरोपी अकेले ही पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। अदालत में पेशी के बाद आरोपी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। पुलिस का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच के बाद कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। साथ ही संभावित पीड़ितों की पहचान कर उनसे संपर्क करने की भी तैयारी की जा रही है।