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राज्यसभा चुनाव में मुस्लिम चेहरों की गैरमौजूदगी: अजमेर दरगाह के सरवर चिश्ती ने कांग्रेस की ‘धर्मनिरपेक्षता’ पर उठाए सवाल

आगामी राज्यसभा चुनावों में किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट न दिए जाने को लेकर अब अजमेर दरगाह से आवाज उठी है। दरगाह की अंजुमन कमेटी के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने एक वीडियो संदेश जारी कर कांग्रेस समेत प्रमुख राजनीतिक दलों को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कांग्रेस की उस ‘धर्मनिरपेक्ष’ छवि पर सवाल खड़े किए हैं, जिसका दावा पार्टी अक्सर करती है। चिश्ती के अनुसार, मुस्लिम समाज दशकों से कांग्रेस का मजबूत समर्थक रहा है, लेकिन सत्ता के गलियारों में प्रतिनिधित्व देने के समय उसे लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।

कांग्रेस पर साधा निशाना, धर्मनिरपेक्षता के दावों पर लगा सवाल

सरवर चिश्ती ने अपने बयान में विशेष रूप से कांग्रेस पार्टी को निशाने पर लिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस स्वयं को धर्मनिरपेक्ष और विविधता की प्रतिनिधि बताती है, लेकिन जब राज्यसभा जैसे उच्च सदन में टिकट बांटने की बारी आती है, तो मुस्लिम चेहरों को पूरी तरह से अनदेखा कर दिया जाता है। उनका कहना है कि केवल चुनावी रैलियों में वोट बैंक की राजनीति करने वाली पार्टियां, जब सत्ता में हिस्सेदारी देने की बात आती है तो अल्पसंख्यक समाज को किनारे कर देती हैं। यह दोहरा चरित्र मुस्लिम समाज के लिए निराशाजनक है और पार्टी की नीयत पर सवालिया निशान लगाता है।

राजनीतिक उपेक्षा: वफादार समाज को मिला किनारा

चिश्ती ने मुस्लिम समाज के ऐतिहासिक जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा कि यह समुदाय लंबे समय से कांग्रेस और उसकी विचारधारा का समर्थक रहा है। चुनाव के समय इस समाज की वफादारी का हवाला देने वाली पार्टी, आखिरकार राज्यसभा जैसे संवैधानिक पदों पर उम्मीदवार चुनते समय उन्हें मौका क्यों नहीं देती? उन्होंने इसे स्पष्ट रूप से ‘राजनीतिक उपेक्षा’ करार दिया है। उनका मानना है कि इस तरह के रवैये से मुस्लिम समाज के बीच एक गलत और निराशाजनक संदेश जा रहा है, जिससे उनके राजनीतिक विश्वास को गहरा धक्का लगा है और वे अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

लोकतंत्र की आत्मा पर चोट: विविधता का होना जरूरी

अजमेर दरगाह के इस प्रमुख पदाधिकारी ने लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं में विविधता के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में राज्यसभा जैसे महत्वपूर्ण सदन में हर वर्ग, समुदाय और तबके की भागीदारी सुनिश्चित होना चाहिए। जब सभी वर्गों के लोग कानून निर्माण की प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे, तभी सही अर्थों में लोकतंत्र की आत्मा जीवित रहेगी। लेकिन मौजूदा राज्यसभा चुनावों की घोषित सूचियों को देखकर साफ लगता है कि राजनीतिक दलों ने विविधता के इस मूल मंत्र को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है, जो एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।

राजनीतिक भूचाल: कांग्रेस के लिए बढ़ी असहज स्थिति

सरवर चिश्ती का यह वीडियो बयान सामने आने के बाद राज्यसभा चुनावों के बीच मुस्लिम प्रतिनिधित्व का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। अजमेर दरगाह जैसे प्रभावशाली धार्मिक-सामाजिक केंद्र से उठी यह आवाज कांग्रेस के लिए काफी असहज स्थिति पैदा कर सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी दल इस मुद्दे को भुनाकर कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष छवि को और अधिक धूमिल करने की कोशिश कर सकते हैं। वहीं, स्वयं कांग्रेस को भी अब इस मुद्दे पर आत्ममंथन करना होगा, अन्यथा आने वाले समय में उसे अपने पारंपरिक वोट बैंक के भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

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