विधायकों की बगावत के बाद अब सांसदों में टूट की बारी, क्या बिखरेगी ममता की ‘टीम दिल्ली’?
पश्चिम बंगाल की सियासत में चल रहा सियासी तूफान अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। विधानसभा में 58 विधायकों की बगावत के बाद अब यह आग संसद तक पहुंच गई है। तृणमूल कांग्रेस के सांसदों में टूट की अटकलों ने ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। दिल्ली में ममता की ‘टीम दिल्ली’ पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अगर लोकसभा में TMC के सांसद भी बंट गए, तो न केवल ममता का राष्ट्रीय कद बौना हो जाएगा, बल्कि विपक्षी एकता को भी भारी झटका लगेगा। यह संकट ममता के राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा पड़ाव साबित हो सकता है।
‘टीम दिल्ली’ पर क्यों मंडरा रहा है संकट का साया?
ममता बनर्जी ने हमेशा से अपनी राष्ट्रीय छवि को मजबूत करने के लिए दिल्ली में एक मजबूत ‘टीम दिल्ली’ तैयार रखी थी। ये सांसद लोकसभा में केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष की आवाज को बुलंद करने का काम करते थे। लेकिन राज्य में विधायकों के बड़े पैमाने पर हुए विद्रोह ने दिल्ली में बैठे सांसदों के मन में भी घबराहट पैदा कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, कई सांसद इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि वे ममता के साथ रहें या ऋतब्रत बनर्जी जैसे विद्रोही नेताओं के सुर में सुर मिलाएं। यह असमंजस पार्टी के राष्ट्रीय ढांचे को कमजोर कर रहा है।
ऋतब्रत बनर्जी का बढ़ता कद, सांसदों पर क्या होगा असर?
विधानसभा में विद्रोही गुट का नेतृत्व कर रहे ऋतब्रत बनर्जी का प्रभाव अब धीरे-धीरे लोकसभा सांसदों पर भी पड़ने लगा है। ऋतब्रत के करीबी माने जाने वाले कुछ सांसदों ने हाल ही में उनके साथ अनौपचारिक बैठकें भी की हैं। माना जा रहा है कि विधायकों को मिली प्रतिपक्ष की मान्यता के बाद, सांसदों का एक बड़ा वर्ग ऋतब्रत की अगुवाई वाले गुट में शामिल हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो ममता बनर्जी की दिल्ली में पकड़ पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। ऋतब्रत का बढ़ता कद साबित कर रहा है कि बंगाल में अब ममता अकेली पड़ गई हैं।
विपक्षी एकता पर पड़ेगा गहरा और दर्दनाक असर
ममता बनर्जी की ‘टीम दिल्ली’ का टूटना सिर्फ TMC की समस्या नहीं है, बल्कि यह केंद्र में बैठे विपक्षी गठबंधन के लिए भी बड़ा झटका होगा। लोकसभा में TMC के सांसदों की संख्या विपक्ष के लिए काफी महत्वपूर्ण है। अगर ये सांसद बिखर गए या सरकार के पक्ष में मतदान करने लगे, तो केंद्र सरकार के लिए किसी भी महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराना बहुत आसान हो जाएगा। विपक्षी दलों को अब यह डर सताने लगा है कि बंगाल का यह सियासी भूकंप दिल्ली की संसद तक पहुंचकर उनकी कमर तोड़ सकता है।
ममता के सामने बड़ी चुनौती, कैसे बचाएंगी राष्ट्रीय छवि?
अब ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी बिखरती हुई ‘टीम दिल्ली’ को बचाने की है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ममता ने जल्द ही दिल्ली के सांसदों को नहीं मनाया, तो उनका राष्ट्रीय नेता के रूप का चेहरा पूरी तरह से धुंधला हो जाएगा। ममता को अब न केवल राज्य में अपने विधायकों को संभालना है, बल्कि दिल्ली में अपने सांसदों के मनोबल को भी ऊंचा रखना है। हालांकि, विद्रोही सुर में सुर मिलाते हुए कुछ सांसदों ने ममता की एकतरफा नीतियों पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।
बीजेपी और शुभेंदु सरकार को मिलेगा बड़ा राजनीतिक फायदा
दिलचस्प बात यह है कि TMC सांसदों की टूट का फायदा सीधे तौर पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी को मिलता दिख रहा है। अगर TMC के सांसदों का एक गुट अलग होता है, तो वे भविष्य में NDA का हिस्सा बन सकते हैं। इससे जहां एक तरफ लोकसभा में NDA के आंकड़े मजबूत होंगे, वहीं राज्य में शुभेंदु अधिकारी की सरकार को केंद्र से अधिक आर्थिक और राजनीतिक सहयोग मिलेगा। ममता के लिए यह दोहरा झटका होगा, जहां राज्य में उनका विपक्ष मजबूत होगा और दिल्ली में उनकी आवाज खत्म हो जाएगी।