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17 दिन पहले घर में गूंजी थी किलकारी, अब तिरंगे में लिपटकर लौटा वीर जवान; पूरे गांव की आंखें हुईं नम

झुंझुनूं जिले के इंडाली गांव में खुशी का माहौल अचानक मातम में बदल गया। महज 17 दिन पहले जिस परिवार में नवजात बेटे के जन्म का जश्न मनाया जा रहा था, उसी घर में सेना के जवान की पार्थिव देह तिरंगे में लिपटकर पहुंची। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए ग्रेनेडियर सुनील कुमार ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।

बेटे के जन्म की खुशियों के बीच आया दुखों का पहाड़

30 वर्षीय ग्रेनेडियर सुनील कुमार कुछ दिन पहले ही छुट्टी लेकर अपने घर आए थे। परिवार में नवजात बेटे के जन्म की खुशियां मनाई जा रही थीं और आगामी दिनों में पारंपरिक कार्यक्रमों की तैयारियां चल रही थीं। इसी बीच 29 मई को एक सड़क दुर्घटना में वे गंभीर रूप से घायल हो गए। पहले स्थानीय स्तर पर उनका उपचार किया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उन्हें जयपुर के सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी और परिवार की खुशियां पलभर में गहरे शोक में बदल गईं।

तिरंगा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, गूंजे देशभक्ति के नारे

जवान की पार्थिव देह जयपुर से उनके पैतृक गांव लाई गई। इस दौरान झुंझुनूं से इंडाली तक युवाओं ने तिरंगा यात्रा निकालकर अपने सैनिक को श्रद्धांजलि दी। यात्रा में बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा लेकर शामिल हुए और पूरे रास्ते भारत माता की जय तथा वंदे मातरम् के नारे गूंजते रहे। ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर अपने वीर बेटे को अंतिम सम्मान दिया। गांव पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और माहौल भावुक हो गया।

अंतिम दर्शन के दौरान बिखर गया परिवार

जब सैनिक की पार्थिव देह घर पहुंची तो परिवार का दर्द देख हर आंख नम हो गई। मां, पिता और अन्य परिजन अपने बेटे को खोने के गम में टूट गए। पत्नी रिंकू देवी पति की अंतिम झलक देखते ही बेसुध हो गईं। कुछ ही दिन पहले जिस घर में बच्चे के जन्म की खुशियां थीं, वहां अब सन्नाटा और शोक पसरा हुआ था। परिजनों की पीड़ा देखकर गांव के लोग भी भावुक हो उठे। हर कोई इस असमय हुई क्षति को लेकर दुख व्यक्त करता नजर आया।

सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

सेना के अधिकारियों और जवानों ने पूरे सम्मान के साथ अपने साथी को अंतिम विदाई दी। पार्थिव देह को सैन्य टुकड़ी की अगुवाई में मुक्तिधाम तक ले जाया गया, जहां गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी गई। अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया। देश सेवा में समर्पित सैनिक को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सैन्य अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए।

मासूम बेटी के हाथों में तिरंगा देख भर आईं आंखें

अंतिम संस्कार का सबसे भावुक क्षण तब आया जब सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रीय ध्वज परिवार को सौंपा। तिरंगा जब जवान की छोटी बेटी के हाथों में पहुंचा तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। यह दृश्य देश सेवा और बलिदान की उस भावना को दर्शा रहा था, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। जवान का निधन केवल एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और देश के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

2018 में सेना में हुए थे भर्ती, हिमाचल में थे तैनात

ग्रेनेडियर सुनील कुमार वर्ष 2018 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के योल कैंप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। अपनी मेहनत, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के कारण वे परिवार और गांव दोनों के लिए गर्व का विषय थे। उनके असामयिक निधन से पूरे इंडाली गांव में शोक की लहर है। ग्रामीणों ने उन्हें एक समर्पित सैनिक और मिलनसार व्यक्तित्व के रूप में याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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