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कोटा में निर्माण हादसा: अंडरपास देखते-देखते मिट्टी में दफन हुए दो रेलवे इंजीनियर

कोटा में NH-52 पर अंडरपास निर्माण के दौरान मिट्टी धंसने से सीनियर इंजीनियर पंकज झा और जूनियर इंजीनियर प्रभात सिंह की मलबे में दबकर मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन देर से पहुंचा।

निर्माण स्थल पर अचानक मिट्टी धंसी, दोनों इंजीनियर दबे

कोटा में राष्ट्रीय राजमार्ग 52 पर दरा की नाल के पास दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक के अंडरपास निर्माण के दौरान गुरुवार को एक भयानक हादसा हो गया। पुश ब्लॉक तकनीक से चल रहे काम के दौरान अचानक मिट्टी धंस गई। इस दौरान निर्माण की निगरानी कर रहे रेलवे के सीनियर इंजीनियर पंकज झा और जूनियर इंजीनियर प्रभात सिंह मलबे की चपेट में आ गए। दोनों को हिलने-डुलने का भी मौका नहीं मिला और वे मिट्टी में जिंदा दफन हो गए। घटनास्थल पर तुरंत रेस्क्यू टीम को बुलाया गया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

रेस्क्यू प्रयास और अस्पताल में मौत की पुष्टि

घटना की सूचना मिलते ही कोटा नगर निगम और रेलवे की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। मलबे हटाने का अभियान चलाया गया, लेकिन दोनों इंजीनियरों को गंभीर हालत में बाहर निकाला गया। रामगंज मंडी के पुलिस उप अधीक्षक घनश्याम मीणा के अनुसार, एक इंजीनियर की मौत मौके पर ही हो गई थी, फिर भी दोनों को तुरंत कोटा के गोबरा बावड़ी स्थित निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। शवों को अस्पताल की मोर्चरी में रखकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।

हादसे की जांच: सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

इस हादसे ने रेलवे प्रशासन और निर्माण एजेंसी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुश ब्लॉक तकनीक से काम करते समय मिट्टी के धंसने की आशंका को नजरअंदाज तो नहीं किया गया? क्या निर्माण स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद थे? दोनों इंजीनियर निगरानी के दौरान खतरे वाले क्षेत्र में क्यों थे? इन सवालों के जवाब ढूंढने के लिए रेल मंडल ने जांच के आदेश दे दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हादसों से बचने के लिए जियो-टेक्निकल सर्वे और रियल-टाइम मॉनिटरिंग अनिवार्य होनी चाहिए।

शोक संतप्त परिवार और रेल मंडल में शोक

दोनों इंजीनियरों की मौत की खबर से रेल मंडल में शोक की लहर दौड़ गई। पंकज झा और प्रभात सिंह दोनों ही अनुभवी और समर्पित अधिकारी बताए जा रहे हैं। उनके परिवारजन इस आकस्मिक दुखद घटना से टूट गए हैं। रेलवे प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को हर संभव सहायता और मुआवजे का आश्वासन दिया है। साथ ही, हादसे के कारण अंडरपास निर्माण कार्य अस्थायी रूप से रोक दिया गया है ताकि जांच पूरी की जा सके और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

भविष्य में सुरक्षा: क्या बदलेगा निर्माण प्रोटोकॉल?

इस हादसे के बाद रेलवे और निर्माण एजेंसियों के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा अनिवार्य हो गई है। विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि भू-तकनीकी जोखिम आकलन, कर्मचारियों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण, और आपातकालीन रेस्क्यू तैयारी को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, निर्माण स्थलों पर रियल-टाइम सेंसर और अलर्ट सिस्टम लगाए जाने चाहिए। कोटा का यह हादसा एक चेतावनी है कि बुनियादी ढांचे के विकास में गति के साथ-साथ सुरक्षा को कभी समझौता नहीं किया जा सकता।

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