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डबल इंजन सरकार पर फिर बरसे अशोक गहलोत, महंगाई से लेकर रिफाइनरी तक उठाए बड़े सवाल

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने एक बार फिर राज्य और केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। जोधपुर दौरे के दौरान उन्होंने महंगाई, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य योजनाओं, बाड़मेर रिफाइनरी और विकास कार्यों में देरी जैसे मुद्दों को लेकर ‘डबल इंजन’ सरकार को घेरा। गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार प्रशासनिक समन्वय और वित्तीय प्रबंधन में विफल साबित हो रही है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाएं कागजों तक सीमित होती जा रही हैं और ज़मीनी स्तर पर लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य योजनाओं और लंबित भुगतानों को लेकर सरकार पर हमला

अशोक गहलोत ने स्वास्थ्य क्षेत्र की योजनाओं को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा शुरू की गई स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत निजी अस्पतालों को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा, जिससे कई अस्पताल मरीजों का इलाज करने से पीछे हट रहे हैं। उनका दावा है कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को मजबूरी में निजी खर्च उठाना पड़ रहा है। गहलोत ने जनऔषधि केंद्रों और सहकारी दवा दुकानों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने वाली व्यवस्थाएं आर्थिक संकट से जूझ रही हैं। साथ ही उन्होंने छात्रों की लंबित छात्रवृत्तियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

बाड़मेर रिफाइनरी को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने बाड़मेर रिफाइनरी परियोजना को लेकर भी सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ लेने की जल्दबाजी में अधूरे कार्यों के बीच बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे से पहले जल्दबाजी में तकनीकी ट्रायल किए गए, जिनमें कई खामियां सामने आईं। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच करवाई जानी चाहिए। गहलोत के अनुसार, उनकी सरकार ने रिफाइनरी परियोजना के लिए एक व्यावहारिक समयसीमा तय की थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने बिना तैयारी के उद्घाटन और प्रचार पर अधिक ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और तकनीकी गुणवत्ता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी।

जोधपुर विकास कार्यों की धीमी रफ्तार पर जताई नाराजगी

Jodhpur के विकास कार्यों का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अधूरी या धीमी गति से चल रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तीसरे चरण के लिए बड़ी राशि स्वीकृत की गई थी ताकि सूखाग्रस्त इलाकों को राहत मिल सके, लेकिन वर्तमान सरकार उचित मॉनिटरिंग नहीं कर पा रही है। गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि जोधपुर में तैयार हो चुकी लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और अस्पतालों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। उनका कहना था कि भवन तैयार होने के बावजूद डॉक्टरों और उपकरणों की कमी से आमजन को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा।

महंगाई और ईंधन कीमतों पर केंद्र सरकार को घेरा

पूर्व मुख्यमंत्री ने पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और सीएनजी की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनावों के बाद लगातार ईंधन दरों में बढ़ोतरी कर आम आदमी पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। गहलोत ने मांग की कि सरकार देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करे ताकि जनता को सच्चाई का पता चल सके। उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर, टैक्सी चालक और मध्यम वर्ग महंगाई की सबसे ज्यादा मार झेल रहे हैं। गहलोत ने यह भी कहा कि सरकार को प्रचार के बजाय पारदर्शिता और जवाबदेही पर ध्यान देना चाहिए ताकि लोगों का भरोसा बना रहे।

कांग्रेस संगठन को मजबूत करने पर दिया जोर

राजनीतिक बयानबाजी के बीच गहलोत ने कांग्रेस संगठन की गतिविधियों की भी सराहना की। उन्होंने Rahul Gandhi के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी जिला स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर रही है। उनके मुताबिक इससे जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को नेतृत्व और प्रबंधन की बेहतर समझ मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के प्रशिक्षण भविष्य में पार्टी संगठन को मजबूत बनाने और चुनावी रणनीति को प्रभावी बनाने में मददगार साबित होंगे।

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