#क्राइम #राज्य-शहर

आवारा कुत्तों को मारने पर रोक की मांग सुप्रीम कोर्ट पहुंची, NGO ने कहा- ‘कानून की गलत हो रही व्याख्या’

देशभर में आवारा कुत्तों को लेकर बढ़ा विवाद, सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई याचिका

देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और उन्हें हटाने की कार्रवाई के बीच अब यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। ‘एनिमल्स आर पीपल टू’ नाम के एक गैर-सरकारी संगठन ने सर्वोच्च अदालत में याचिका दाखिल कर मांग की है कि किसी भी राज्य या स्थानीय प्रशासन को आवारा कुत्तों की अंधाधुंध हत्या की अनुमति न दी जाए। संगठन का कहना है कि हाल के न्यायिक निर्देशों की कई जगह गलत व्याख्या की जा रही है, जिससे जानवरों के अधिकारों और उनके संरक्षण से जुड़े कानूनों का उल्लंघन हो रहा है। याचिका में कोर्ट से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है।

NGO का दावा- सिर्फ विशेष परिस्थितियों में ही संभव है इच्छामृत्यु

याचिका में कहा गया है कि किसी भी आवारा कुत्ते को केवल सीमित और विशेष परिस्थितियों में ही इच्छामृत्यु दी जा सकती है। इसके लिए विशेषज्ञों द्वारा मेडिकल जांच और कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी होना चाहिए। संगठन ने Animal Birth Control (ABC) Rules 2023 का हवाला देते हुए कहा कि नियमों के तहत बिना उचित परीक्षण और अनुमति के किसी जानवर को मारना गैरकानूनी है। NGO का आरोप है कि कुछ प्रशासनिक एजेंसियां और स्थानीय निकाय सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं, जिससे कई जगहों पर आवारा कुत्तों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है।

पंजाब अभियान के बाद बढ़ी बहस

हाल ही में पंजाब में आवारा कुत्तों को पकड़ने और हटाने का विशेष अभियान शुरू किया गया, जिसके बाद यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा अभियान की जानकारी साझा किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कई पशु प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने इसे अमानवीय बताया। अभिनेत्री रवीना टंडन सहित कई लोगों ने सरकार से संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील की। उनका कहना था कि समाज का असली चेहरा इस बात से पता चलता है कि वह बेजुबान जानवरों के साथ कैसा व्यवहार करता है। इस विवाद ने पशु सुरक्षा और जनसुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

बढ़ते डॉग बाइट मामलों से प्रशासन भी चिंतित

देश के कई राज्यों में आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। बच्चे, बुजुर्ग और राहगीर अक्सर इन घटनाओं का शिकार बन रहे हैं, जिससे आम लोगों में डर का माहौल है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार डॉग बाइट के मामलों के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। इसी को देखते हुए पहले सुप्रीम कोर्ट ने नसबंदी, वैक्सीनेशन और शेल्टर होम जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए थे। हालांकि कई राज्यों में इन व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी सबकी नजर

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। एक तरफ पशु अधिकार संगठनों का कहना है कि कानून के तहत जानवरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कुत्तों को हटाने या मारने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए नसबंदी, टीकाकरण, कचरा प्रबंधन और शेल्टर सिस्टम को मजबूत करना जरूरी है। अदालत का आगामी फैसला देशभर में आवारा जानवरों से जुड़े कानूनों और प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा तय कर सकता है।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *