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संघर्ष से स्टारडम तक: पतंग बेचने वाले सुनील पॉल बने कॉमेडी की दुनिया के ‘गुरू’

मशहूर स्टैंडअप कॉमेडियन Sunil Pal ने हाल ही में अपने संघर्ष भरे जीवन और कॉमेडी इंडस्ट्री के अनुभवों को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब परिवार का पेट पालने के लिए उन्हें पतंगें, डबल रोटी और सब्जियां तक बेचनी पड़ीं। हाल ही में The Great Indian Kapil Show में दिखाई देने के बाद वे फिर चर्चा में आए, जहां कॉमेडियन Samay Raina के मजाक से वे असहज महसूस कर बैठे। अब उन्होंने इस पूरे मामले और आज की कॉमेडी के स्तर पर अपनी राय सामने रखी है।

छोटे गांव से शुरू हुआ संघर्षों का सफर

सुनील पॉल ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनका बचपन महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के बलहरशाह गांव में बीता। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें बचपन से ही छोटे-मोटे काम करने पड़े। कभी वे पतंगें बेचते थे, तो कभी डबल रोटी और सब्जियां बेचकर परिवार की मदद करते थे। इतना ही नहीं, जन्मदिन पार्टियों में मिकी माउस बनकर बच्चों का मनोरंजन भी करते थे। उन्होंने कुम्हार का काम और मंडियों में मजदूरी तक की। सुनील ने कहा कि इन्हीं संघर्षों ने उन्हें मजबूत बनाया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। लगातार मेहनत और कॉमेडी के प्रति जुनून ने उन्हें इंडस्ट्री में खास पहचान दिलाई।

कॉमेडी की दुनिया में बनाया बड़ा नाम

कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद सुनील पॉल ने स्टैंडअप कॉमेडी में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी कॉमिक टाइमिंग और साफ-सुथरे हास्य ने दर्शकों का दिल जीता। इंडस्ट्री में कई नए कॉमेडियन उन्हें अपना प्रेरणास्रोत और गुरू मानते हैं। सुनील का कहना है कि कॉमेडी केवल हंसाने का माध्यम नहीं बल्कि समाज को सकारात्मक संदेश देने का तरीका भी है। उन्होंने अपने करियर में हमेशा पारिवारिक और सभ्य कॉमेडी को प्राथमिकता दी। यही वजह है कि वे आज भी दर्शकों के बीच सम्मानित कलाकारों में गिने जाते हैं।

कपिल शर्मा शो के अनुभव पर छलका दर्द

हाल ही में कपिल शर्मा के शो में पहुंचे सुनील पॉल ने वहां हुए एक मजाक को लेकर नाराजगी जाहिर की। शो में समय रैना द्वारा किए गए मजाक से वे खुद को अपमानित महसूस कर बैठे। उन्होंने कहा कि कॉमेडी के नाम पर किसी का मजाक उड़ाना या उसे असहज करना सही नहीं है। सुनील ने मौजूदा दौर की भद्दी और फूहड़ कॉमेडी पर भी चिंता जताई। उनका मानना है कि इस तरह की सामग्री युवा पीढ़ी के मानसिक स्तर और सोच पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने साफ कहा कि हास्य ऐसा होना चाहिए जो लोगों को हंसाए, न कि किसी को नीचा दिखाए।

साफ-सुथरी कॉमेडी की वकालत

सुनील पॉल ने कहा कि कॉमेडी का उद्देश्य मनोरंजन के साथ सकारात्मकता फैलाना होना चाहिए। उन्होंने नए कॉमेडियंस से अपील की कि वे लोकप्रियता के लिए अश्लीलता और अपमानजनक भाषा का सहारा न लें। उनके अनुसार दर्शक आज भी अच्छी और पारिवारिक कॉमेडी को पसंद करते हैं। उन्होंने अपने संघर्षों का उदाहरण देते हुए कहा कि मेहनत और ईमानदारी से हासिल की गई सफलता ही सबसे बड़ी उपलब्धि होती है।

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