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भारत में बड़ी साजिश नाकाम, ISI लिंक नेटवर्क पर देशभर में बड़ा एक्शन

भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी Inter-Services Intelligence से जुड़े कथित गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए एक संभावित साजिश को नाकाम करने का दावा किया है। देशभर में चलाए गए संयुक्त ऑपरेशन में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में एक साथ छापेमारी की गई। इस दौरान 300 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को आपराधिक गतिविधियों और देशविरोधी नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी।

कई राज्यों में एक साथ चला बड़ा ऑपरेशन

सुरक्षा एजेंसियों द्वारा शुरू किए गए इस पैन इंडिया ऑपरेशन में दिल्ली पुलिस, हरियाणा एसटीएफ और केंद्रीय जांच एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई की। बीती रात से शुरू हुई छापेमारी के दौरान पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के कई इलाकों में दबिश दी गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों से 40 से ज्यादा संदिग्धों को हिरासत में लिया गया, जबकि हरियाणा में करीब 90 युवकों को पूछताछ के लिए पकड़ा गया। दिल्ली पुलिस ने भी कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर उनके डिजिटल रिकॉर्ड और संपर्कों की जांच शुरू कर दी है।

सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को फंसाने की कोशिश

जांच एजेंसियों के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठे कथित गैंगस्टर नेटवर्क के सदस्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय युवाओं को निशाना बना रहे थे। उन्हें आसान पैसे, विदेश यात्रा और बड़े आपराधिक कामों का लालच देकर नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश की जा रही थी। एजेंसियों को 500 से ज्यादा संदिग्ध मोबाइल नंबरों और सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी मिली है। इसके आधार पर डिजिटल निगरानी बढ़ाई गई और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल युवाओं की पहचान की गई। कई अकाउंट्स को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

युवाओं को दिए जा रहे थे खतरनाक टास्क

जांच में सामने आया है कि नेटवर्क से जुड़े कुछ युवाओं को रेकी करने, संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाने और कॉन्ट्रैक्ट किलिंग जैसे खतरनाक टास्क दिए जा रहे थे। एजेंसियों को आशंका है कि यह नेटवर्क संगठित अपराध के साथ-साथ देश की सुरक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की दिशा में भी सक्रिय था। कुछ संदिग्धों के मोबाइल फोन और डिजिटल चैट्स में संदिग्ध लेन-देन और विदेशी संपर्कों के संकेत मिले हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की फंडिंग और ऑपरेशन मोड को खंगाल रही हैं।

काउंसलिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग पर भी फोकस

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि युवाओं को कट्टरपंथ और अपराध के रास्ते से दूर रखना भी है। कई युवाओं की काउंसलिंग कराई जा रही है ताकि वे दोबारा ऐसे नेटवर्क के संपर्क में न आएं। साथ ही साइबर टीम संदिग्ध सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी कर रही है। एजेंसियों का मानना है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को भटकाने की यह नई रणनीति आने वाले समय में बड़ा खतरा बन सकती है।

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