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बर्तन मांजने से विधानसभा तक: संघर्ष की मिसाल बनीं कलिता माझी, दूसरी बार भरोसा मिला तो दर्ज की ऐतिहासिक जीत

पश्चिम बंगाल की ऑसग्राम सुरक्षित सीट से बीजेपी उम्मीदवार कलिता माझी ने शानदार जीत दर्ज कर संघर्ष से सफलता तक की मिसाल पेश की है। घरेलू काम कर परिवार चलाने वालीं कलिता ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद राजनीति में अपनी पहचान बनाई। 2021 में हार के बाद भी पार्टी ने उन पर भरोसा कायम रखा और 2026 में उन्होंने जीत हासिल कर इसे सही साबित कर दिया।

संघर्ष भरी जिंदगी से राजनीति तक का सफर

कलिता माझी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें घर-घर जाकर बर्तन मांजने का काम करना पड़ता था। इसी कमाई से वह अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और समाज के बीच सक्रिय बनी रहीं। यही जुझारूपन उन्हें राजनीति की ओर ले गया। एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर विधायक बनना उनके लिए ही नहीं, बल्कि समाज के कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है।

बूथ कार्यकर्ता से विधायक बनने तक का सफर

करीब एक दशक पहले कलिता माझी ने राजनीति में एक साधारण बूथ स्तर की कार्यकर्ता के रूप में शुरुआत की थी। अपनी मेहनत, सक्रियता और जनता से जुड़ाव के कारण उन्होंने धीरे-धीरे पार्टी में पहचान बनाई। जमीनी स्तर पर काम करने की उनकी क्षमता ने पार्टी नेतृत्व का ध्यान आकर्षित किया। यही कारण रहा कि उन्हें पहले 2021 में और फिर 2026 में टिकट दिया गया। उनकी यह यात्रा बताती है कि समर्पण और मेहनत से राजनीति में भी नई ऊंचाइयां हासिल की जा सकती हैं।

2021 की हार के बाद भी कायम रहा भरोसा

2021 के विधानसभा चुनाव में कलिता माझी को पहली बार मौका मिला था, लेकिन वह जीत हासिल नहीं कर पाईं। इसके बावजूद उन्होंने अपने क्षेत्र में काम जारी रखा और जनता से संपर्क बनाए रखा। पार्टी ने भी उनके प्रयासों को नजरअंदाज नहीं किया और 2026 में एक बार फिर उन पर भरोसा जताया। यह निर्णय सही साबित हुआ, क्योंकि उन्होंने इस बार कड़े मुकाबले में जीत दर्ज कर पार्टी की उम्मीदों को पूरा किया।

कड़े मुकाबले में दर्ज की जीत
ऑसग्राम सीट पर कलिता

माझी ने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार को हराते हुए शानदार जीत हासिल की। उन्हें 1,07,692 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी को 95,157 वोट प्राप्त हुए। इस तरह उन्होंने 12 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। यह जीत न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि उन लोगों के लिए भी उम्मीद की किरण है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

जनता के भरोसे को विकास में बदलने का संकल्प

विधायक बनने के बाद कलिता माझी ने क्षेत्र के विकास को अपनी प्राथमिकता बताया है। उन्होंने कहा कि वह इलाके में फायर ब्रिगेड और अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था कराने का प्रयास करेंगी। जनता के समर्थन को उन्होंने अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया। उनका कहना है कि यह जीत जनता के आशीर्वाद का परिणाम है और वह उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए पूरी मेहनत करेंगी।

चुनाव परिणाम और राजनीतिक परिदृश्य

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में बीजेपी को बहुमत मिला है, जबकि टीएमसी और अन्य दल पीछे रह गए हैं। इस चुनाव में कई ऐसे चेहरे सामने आए हैं, जिन्होंने अपने संघर्ष और मेहनत के दम पर जीत हासिल की है। कलिता माझी की कहानी भी उन्हीं में से एक है, जो यह साबित करती है कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति के पास आगे बढ़ने का अवसर होता है।

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