बंगाल-असम में CM भजनलाल का असर? जिन सीटों पर किया प्रचार, वहां बदले समीकरण
भजनलाल शर्मा के बंगाल और असम में चुनावी प्रचार का असर अब नतीजों में दिखता नजर आ रहा है। प्रवासी और शहरी वोटर्स को साधने के लिए किए गए टारगेटेड कैंपेन ने कई सीटों पर बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाया, खासकर सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में पार्टी को बढ़त मिलती दिख रही है।
दो राज्यों में अलग रणनीति, एक ही लक्ष्य
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को असम और पश्चिम बंगाल में अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। असम में उन्होंने संगठनात्मक बैठकों, प्रवास कार्यक्रमों और कार्यकर्ताओं से संवाद पर जोर दिया। यहां उनका फोकस सीधे वोट मांगने से ज्यादा संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने पर रहा। वहीं बंगाल में उनका प्रचार ज्यादा आक्रामक और राजनीतिक रूप से सक्रिय दिखाई दिया।
सिलीगुड़ी में रोड शो और प्रवासी वोट बैंक पर फोकस
सिलीगुड़ी में सीएम का रोड शो काफी प्रभावी माना गया। इसके अलावा कोलकाता के कालीघाट मंदिर से उन्होंने अपने अभियान की शुरुआत की। यहां जनसभाओं और खासकर मारवाड़ी (प्रवासी राजस्थानी) समुदाय से संवाद के जरिए उन्होंने एक खास वोट बैंक को टारगेट किया, जिसका असर अब रुझानों में दिख रहा है।
इन सीटों पर दिखा असर, BJP को बढ़त
चुनावी रुझानों के मुताबिक, सिलीगुड़ी सीट पर बीजेपी प्रत्याशी शंकर घोष करीब 47 हजार वोटों से आगे चल रहे हैं। इसके अलावा दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और कूचबिहार जैसे इलाकों में भी पार्टी का प्रदर्शन पिछले चुनाव (2021) की तुलना में बेहतर नजर आ रहा है। इसे सीएम के टारगेटेड कैंपेन से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रवासी वोटर्स पर खास पकड़
विशेषज्ञ मानते हैं कि भजनलाल शर्मा का फोकस प्रवासी और शहरी वोटर्स पर रहा, खासकर मारवाड़ी समाज को जोड़ने पर। उनके कार्यक्रमों और संवाद का असर इन वर्गों में देखने को मिला, जिससे बीजेपी को इन क्षेत्रों में बढ़त बनाने में मदद मिली। यह रणनीति पार्टी के लिए गेम चेंजर साबित होती दिख रही है।
संगठन + रणनीति = चुनावी बढ़त
इस चुनाव में साफ नजर आया कि केवल बड़े नेता या रैलियां ही नहीं, बल्कि संगठन की मजबूती और सही रणनीति भी जीत की कुंजी होती है। भजनलाल शर्मा ने दोनों राज्यों में अलग-अलग रणनीतियों के जरिए पार्टी को फायदा पहुंचाया, जो अब नतीजों में झलक रहा है।