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“डार्क ज़ोन से जल समृद्धि की ओर: अलवर में बन रहे 5 एनीकट बदलेंगे पानी का भविष्य”

करीब दो दशकों से गिरते भूजल स्तर और पानी की किल्लत से जूझ रहे अलवर के लिए अब राहत की बड़ी उम्मीद नजर आ रही है। सड़क जाम, मटका फोड़ प्रदर्शन और पेयजल संकट की खबरों के बीच जिला प्रशासन ने जल संरक्षण की दिशा में एक मजबूत और दूरदर्शी कदम उठाया है। शहर के आसपास पांच बड़े एनीकट और जल संरचनाओं का निर्माण तेजी से किया जा रहा है, ताकि इस मानसून में हर बूंद को सहेजा जा सके। खास बात यह है कि इस पूरे अभियान की कमान खुद जिला कलक्टर आर्तिका शुक्ला ने संभाल रखी है, जो लगातार मॉनिटरिंग कर इसे मिशन मोड में आगे बढ़ा रही हैं।

अलवर, जो कभी जल संकट का पर्याय बनता जा रहा था, अब एक नई उम्मीद की कहानी लिख रहा है। पिछले करीब 20 सालों से लगातार गिरते भूजल स्तर के चलते पूरा जिला ‘डार्क ज़ोन’ में पहुंच गया था। लेकिन अब हालात बदलने की तैयारी है।

जिला प्रशासन ने बारिश के पानी को रोककर भूजल स्तर बढ़ाने के लिए पांच बड़े एनीकट और कई जल संरचनाओं का निर्माण शुरू किया है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सिर्फ पानी बचाना ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीवों को जल उपलब्ध कराना और पर्यटन को भी बढ़ावा देना भी है।

इस पूरे अभियान की अगुवाई कर रही हैं जिला कलक्टर आर्तिका शुक्ला, जिन्होंने जल प्रबंधन को लेकर एक विजन के साथ काम शुरू किया है। उनकी सक्रियता और निरंतर मॉनिटरिंग के चलते यह प्रोजेक्ट अब तेजी से जमीन पर उतरता दिख रहा है।

प्रताप बंध के पास करीब 4.94 करोड़ रुपये की लागत से एक विशाल पॉण्ड और सोनानाथ की बावड़ी तक चैनल का निर्माण किया जा रहा है। 6950 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाले इस पॉण्ड को 3 मीटर और गहरा किया जा रहा है, जिससे इसकी क्षमता 21,000 घनमीटर तक पहुंचेगी।

वहीं जरखवाला क्षेत्र में 3.61 करोड़ रुपये की लागत से दो पॉण्ड और एक एनीकट का निर्माण कार्य तेजी से जारी है, जो 40 हेक्टेयर कैचमेंट एरिया को कवर करेगा। यहां खुदाई पूरी हो चुकी है और अब पिचिंग का काम चल रहा है।

भूरासिद्ध क्षेत्र में भी 2.23 करोड़ रुपये की लागत से जल संरचनाएं अंतिम चरण में हैं। इसके साथ ही माचिया कुंड के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे पर्यटन को नया आयाम मिलेगा।

वन मंत्री संजय शर्मा भी इस पूरे प्रोजेक्ट की लगातार निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने भाखेड़ा, माचिया कुंड और प्रताप बंध सहित कई स्थलों का निरीक्षण कर अधिकारियों को मानसून से पहले गुणवत्ता के साथ काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

जिला कलक्टर आर्तिका शुक्ला की कार्यशैली इस पूरे अभियान में एक प्रेरक शक्ति के रूप में सामने आई है। उन्होंने न सिर्फ योजनाओं को गति दी है, बल्कि हर छोटे-बड़े तकनीकी पहलू पर खुद नजर रखते हुए निगम आयुक्त सोहन सिंह नरूका , नगर विकास न्यास एक्स ई एन अशोक मदान सहित अन्य अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा कर रही हैं। उनके नेतृत्व में यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि अलवर के भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प बन चुका है।

खास बात यह भी है कि चंबल से पानी लाने की योजना में अभी समय लग सकता है, ऐसे में ये प्राकृतिक डेम और एनीकट अलवर के लिए जीवनदायिनी साबित हो सकते हैं।

प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि मानसून से पहले सभी संरचनाएं पूरी तरह तैयार हो जाएं और कैचमेंट एरिया में किसी भी तरह की रुकावट न रहे, ताकि बारिश का हर बूंद सीधे इन जलाशयों तक पहुंचे।

अगर ये प्रयास सफल होते हैं, तो आने वाले समय में अलवर न सिर्फ जल संकट से उबर पाएगा, बल्कि जल संरक्षण का एक मॉडल बनकर उभरेगा।

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