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Supreme Court of India में अजीब दलील, ‘चूहों ने खाए घूस के नोट?’

सुप्रीम कोर्ट में चौंकाने वाली दलील

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक ऐसा तर्क सामने आया जिसने अदालत को भी हैरान कर दिया। रिश्वत मामले में यह कहा गया कि जब्त किए गए नोट चूहों द्वारा नष्ट कर दिए गए, जिसके कारण उन्हें अदालत में पेश नहीं किया जा सका। इस दलील पर कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए और मामले की परिस्थितियों को असामान्य बताते हुए विस्तृत सुनवाई की जरूरत जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह के दावों की गहन जांच जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

महिला अधिकारी को मिली राहत

इस मामले में आरोपी बिहार की सीडीपीओ अधिकारी अरुणा कुमारी को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा पर फिलहाल रोक लगाते हुए जमानत दे दी है। कोर्ट का यह फैसला अंतरिम राहत के रूप में देखा जा रहा है, जब तक कि मामले की पूरी सुनवाई नहीं हो जाती। इससे पहले उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिसमें रिश्वत लेने के आरोप शामिल थे।

ट्रायल कोर्ट से बरी, हाई कोर्ट ने ठहराया दोषी

मामले में कानूनी प्रक्रिया भी काफी दिलचस्प रही। ट्रायल कोर्ट ने पहले अरुणा कुमारी को बरी कर दिया था, लेकिन बाद में पटना हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया। हाई कोर्ट ने विभिन्न धाराओं के तहत सजा भी सुनाई थी। अदालत ने यह माना कि रिश्वत की रकम का रिकॉर्ड मौजूद है, भले ही नोट अदालत में पेश नहीं किए जा सके हों। इस फैसले के बाद मामला और अधिक जटिल हो गया।

सबूतों पर उठे सवाल

रिश्वत की रकम के कथित तौर पर नष्ट होने के दावे ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। हालांकि मालखाना रजिस्टर में रकम जमा होने का रिकॉर्ड मौजूद बताया गया, लेकिन भौतिक सबूतों की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट अब इस बात की गहराई से जांच करेगा कि क्या वास्तव में सबूत नष्ट हुए या इसके पीछे कोई और वजह है। इस पहलू पर ही आगे की सुनवाई में मुख्य फोकस रहने की संभावना है।

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