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पवन खेड़ा को राहत नहीं, हाई कोर्ट से झटका; सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी कांग्रेस

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को गुवाहाटी हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है, जहां उनकी अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी गई। इस फैसले के खिलाफ अब कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। पार्टी ने इसे राजनीतिक दबाव और उत्पीड़न का मामला बताते हुए न्यायपालिका पर भरोसा जताया है। मामले ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है, क्योंकि इसमें असम के मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े आरोप भी शामिल हैं।

हाई कोर्ट के फैसले से बढ़ी कानूनी चुनौती

गुवाहाटी हाई कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद पवन खेड़ा की कानूनी स्थिति जटिल हो गई है। अदालत के इस फैसले ने उनके खिलाफ चल रही जांच को और मजबूती दी है। अब खेड़ा को संभावित गिरफ्तारी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनकी कानूनी टीम पर दबाव बढ़ गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अपने चरम पर हैं और हर पक्ष इसे अपने-अपने तरीके से पेश कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती की तैयारी

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने स्पष्ट किया है कि पार्टी इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही याचिका दाखिल की जाएगी। पार्टी का मानना है कि उन्हें उच्चतम न्यायालय से राहत मिल सकती है। जयराम रमेश ने यह भी कहा कि कांग्रेस अपने नेताओं के साथ मजबूती से खड़ी है और इस मामले को पूरी ताकत से लड़ेगी।

आरोपों से जुड़ा विवाद और राजनीतिक असर

यह पूरा मामला हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी को लेकर लगाए गए आरोपों से जुड़ा है, जिसमें कई पासपोर्ट और विदेश में कथित अघोषित संपत्तियों का जिक्र किया गया था। इन आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है। सत्तारूढ़ पक्ष ने इसे बेबुनियाद बताया है, जबकि कांग्रेस इसे पारदर्शिता का मुद्दा बता रही है। इस विवाद ने असम की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल पैदा कर दी है।

कांग्रेस का रुख: ‘डराने-धमकाने की राजनीति’

कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। जयराम रमेश ने कहा कि यह कार्रवाई विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश है। उन्होंने भरोसा जताया कि न्यायपालिका निष्पक्ष निर्णय देगी और सच सामने आएगा। पार्टी का कहना है कि वे इस लड़ाई को कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर लड़ेंगे, और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए पीछे नहीं हटेंगे।

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