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अलवर पुलिस का बड़ा अभियान: ड्रग्स नेटवर्क पर करारा प्रहार, सप्लायर्स की संपत्ति तक होगी जब्त

अलवर जिले में नशे और साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस ने सख्त और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि ड्रग्स के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाएगा और सप्लायर्स की संपत्ति भी जब्त की जाएगी। लगातार चल रहे अभियानों के तहत बड़ी संख्या में गिरफ्तारी, जब्ती और साइबर ठगी की रकम की रिकवरी ने पुलिस की सक्रियता और प्रतिबद्धता को साबित किया है।

नशे के खिलाफ सख्त अभियान, रिकॉर्ड कार्रवाई

अलवर पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी और बिक्री के खिलाफ व्यापक स्तर पर अभियान चलाते हुए उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वर्ष 2026 में अब तक 55 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक हैं। इस दौरान 64 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। पुलिस ने विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर नशे के कई अड्डों की पहचान की है। जब्त किए गए मादक पदार्थों में स्मैक, गांजा, डोडा चूरा और डोडा पोस्त शामिल हैं। यह अभियान दर्शाता है कि पुलिस अब केवल कार्रवाई ही नहीं बल्कि नशे की जड़ों को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है।

ऑपरेशन के तहत लगातार गिरफ्तारी और सख्त संदेश

विशेष अभियानों के तहत 15 मार्च 2026 से अब तक 33 नए प्रकरण दर्ज किए गए हैं। पुलिस की यह रणनीति पूरी तरह सुनियोजित और परिणाम आधारित नजर आती है, जिसमें छोटे अपराधियों से लेकर बड़े सप्लायर तक सभी को निशाने पर लिया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि नशे का कारोबार करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उनकी संपत्ति तक जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी, जिससे इस अवैध धंधे की आर्थिक रीढ़ तोड़ी जा सके।

म्यूल अकाउंट और अवैध हथियारों पर भी शिकंजा

नशे के साथ-साथ पुलिस ने म्यूल अकाउंट और अवैध हथियारों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की है। 1 अप्रैल से 24 अप्रैल तक 40 मामलों में 40 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 5 बाल अपचारियों को निरुद्ध किया गया। इसके अलावा आर्म्स एक्ट के तहत 49 प्रकरण दर्ज कर बड़ी मात्रा में हथियार और कारतूस बरामद किए गए हैं। यह दर्शाता है कि पुलिस अपराध के हर पहलू पर समान रूप से ध्यान दे रही है और कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है।

साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण, लाखों की रकम लौटाई

साइबर संग्राम 2.0 अभियान के तहत अलवर पुलिस ने साइबर ठगी के मामलों में भी बड़ी सफलता हासिल की है। एक करोड़ से अधिक की ठगी राशि को होल्ड कराया गया है, जबकि 33 लाख रुपये से अधिक की रकम पीड़ितों को वापस दिलाई गई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शिकायतों का समाधान किया और पीड़ितों को राहत पहुंचाई। यह पहल आम जनता में पुलिस के प्रति विश्वास को और मजबूत करती है।

तकनीकी प्लेटफॉर्म के जरिए बढ़ी कार्यक्षमता

सीईआईआर और अन्य पोर्टल्स के माध्यम से पुलिस ने 303 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को सौंपे। साथ ही 210 साइबर अपराधियों की पहचान कर विभिन्न राज्यों की पुलिस से समन्वय स्थापित किया गया। 81 वारंट और नोटिस जारी कर अपराधियों पर दबाव बनाया गया। इस तरह की तकनीकी दक्षता और समन्वय पुलिस की आधुनिक कार्यशैली को दर्शाता है, जो तेजी से बदलते अपराध के स्वरूप के अनुरूप खुद को ढाल रही है।

जनजागरूकता से मजबूत हो रही सुरक्षा व्यवस्था

पुलिस ने केवल कार्रवाई तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि जनजागरूकता को भी अभियान का अहम हिस्सा बनाया। 775 शिविरों के माध्यम से 60 हजार से अधिक लोगों को साइबर सुरक्षा और नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया। पुलिस मित्रों और स्थानीय संगठनों के सहयोग से यह अभियान और प्रभावी बना। यह प्रयास दर्शाता है कि पुलिस समाज के साथ मिलकर सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

जनता से सहयोग की अपील, गोपनीयता का भरोसा


पुलिस अधीक्षक ने आमजन से अपील की है कि वे नशे या साइबर अपराध से जुड़ी किसी भी जानकारी को साझा करें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। साथ ही लोगों को ओटीपी, पिन साझा न करने और ऑनलाइन ठगी से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पुलिस का यह भरोसा और पारदर्शिता जनता के सहयोग को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है।

यह पूरी कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि अलवर पुलिस न केवल अपराधियों के खिलाफ सख्त है, बल्कि जिले को सुरक्षित और नशामुक्त बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।

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