शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी की सुरक्षा में कटौती से विवाद, 3 पीएसओ हटाने पर समर्थकों में रोष
बाड़मेर जिले की शिव विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी की सुरक्षा व्यवस्था में हालिया बदलाव ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। प्रशासन द्वारा उनकी सुरक्षा में तैनात अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को हटाए जाने के बाद समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है। इस फैसले को लेकर न सिर्फ सवाल उठ रहे हैं, बल्कि आदेश को ‘बैक डेट’ में जारी करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं, जिससे मामला और ज्यादा संवेदनशील बन गया है।
सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव से बढ़ी चिंता
प्रशासनिक आदेश के बाद विधायक रविंद्र सिंह भाटी की सुरक्षा में तैनात अतिरिक्त बल को हटा लिया गया है। पहले उनकी सुरक्षा में कुल चार पुलिसकर्मी मौजूद थे, जिनमें एक स्थायी पीएसओ और तीन अतिरिक्त पीएसओ शामिल थे। नई व्यवस्था के तहत तीनों अतिरिक्त पीएसओ को वापस बुला लिया गया है और अब सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल एक गनमैन पर छोड़ दी गई है। इस बदलाव के बाद स्थानीय स्तर पर सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है, खासकर तब जब भाटी क्षेत्र में सक्रिय और जनसंपर्क में लगातार जुड़े रहने वाले नेता माने जाते हैं।
समर्थकों ने फैसले पर उठाए सवाल
सुरक्षा में कटौती के फैसले ने विधायक भाटी के समर्थकों को नाराज कर दिया है। उनका कहना है कि एक जनप्रतिनिधि की सुरक्षा को इस तरह कम करना उचित नहीं है, खासकर तब जब वह क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहता हो। समर्थकों का मानना है कि यह निर्णय सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है और इससे विधायक की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जहां लोग इस फैसले की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
‘बैक डेट’ में आदेश जारी करने का आरोप
विवाद को और हवा तब मिली जब भाटी समर्थकों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा में कटौती का आदेश पिछली तारीख में जारी किया गया है। उनका कहना है कि इस तरह का कदम प्रक्रियात्मक पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन इस दावे ने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है। प्रशासन की ओर से अब तक इस संबंध में कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे स्थिति को लेकर असमंजस बना हुआ है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज
यह मुद्दा अब स्थानीय स्तर से निकलकर व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बन चुका है। बाड़मेर से लेकर जयपुर तक इस फैसले पर बहस जारी है। जहां एक ओर समर्थक सुरक्षा बहाल करने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की चुप्पी सवालों को और बढ़ा रही है। समर्थकों ने संकेत दिए हैं कि यदि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएंगे। फिलहाल सभी की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।