अंबेडकर जयंती पर सियासी वार: टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर लगाए संविधान विरोधी कदमों के आरोप
जयपुर में अंबेडकर जयंती के अवसर पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्थाओं की अनदेखी की जा रही है। जूली ने चुनावों में देरी, जनकल्याणकारी योजनाओं में कटौती और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग जैसे मुद्दों को उठाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।
अंबेडकर के आदर्शों को लेकर सरकार पर सवाल
टीकाराम जूली ने कहा कि डॉ. अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान देश की लोकतांत्रिक नींव है, जिसने सभी वर्गों को समान अधिकार दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बाबासाहेब का संघर्ष केवल एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के उत्थान के लिए था। जूली के अनुसार, आज जरूरत इस बात की है कि सरकार उनके सिद्धांतों को व्यवहार में उतारे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार केवल प्रतीकात्मक सम्मान तक सीमित है, जबकि वास्तविक नीतियों में अंबेडकर के विचारों की अनदेखी हो रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक संकेत है।
स्थानीय निकाय चुनाव टालने पर उठे सवाल
प्रदेश में पंचायती राज और नगर निकाय चुनाव समय पर नहीं होने को लेकर जूली ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार निर्धारित समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है, लेकिन सरकार इससे बचने का प्रयास कर रही है। न्यायालय में समय बढ़ाने की मांग को उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया से दूरी बनाने वाला कदम बताया। जूली का कहना था कि यह रवैया न केवल संवैधानिक प्रावधानों की अवहेलना है, बल्कि जनता के अधिकारों को भी कमजोर करता है। उन्होंने ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग की।
जनकल्याणकारी योजनाओं में कटौती का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार गरीब और जरूरतमंद वर्ग के हितों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार की कई योजनाएं, जैसे राशन सहायता और रोजगार गारंटी कार्यक्रम, या तो बंद की जा रही हैं या कमजोर हो रही हैं। पेंशन में देरी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में कमी को उन्होंने गंभीर चिंता का विषय बताया। जूली के मुताबिक, सरकार की प्राथमिकताएं आम जनता से हटकर अन्य दिशा में जा रही हैं, जिससे कमजोर वर्गों को सीधा नुकसान हो रहा है और सामाजिक असंतुलन बढ़ने का खतरा है।
आरक्षण और रोजगार को लेकर सरकार पर निशाना
जूली ने आरक्षण व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रोस्टर प्रणाली का सही पालन नहीं हो रहा है और कई भर्तियां लंबे समय से लंबित हैं। इससे युवाओं में निराशा का माहौल बन रहा है। उनका कहना था कि सरकार रोजगार सृजन के बजाय आंकड़ों के सहारे अपनी उपलब्धियां दिखाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने मांग की कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाई जाए और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि युवाओं को बराबरी के अवसर मिल सकें।
केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप
केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधते हुए जूली ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई और आयकर विभाग जैसी संस्थाओं का राजनीतिक हितों के लिए उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिससे लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर होती है। जूली के अनुसार, स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जरूरी है कि सभी संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से कार्य करें, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां इसके विपरीत संकेत दे रही हैं।