अलवर में भगवान महावीर जयंती पर भव्य शोभायात्रा, 100 साल पुराने स्वर्ण रथ में विराजे प्रभु
संशोधित खबर:
अलवर शहर में पल्लीवाल समाज सहित जैन समाज के चारों समुदायों द्वारा भगवान महावीर जयंती महोत्सव धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें भगवान महावीर स्वामी को करीब 100 वर्ष पुराने स्वर्ण पत्रों से सुसज्जित रथ में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया।
शोभायात्रा में कुल 45 आकर्षक झांकियां सजाई गईं, जिनमें भगवान महावीर के जन्म से लेकर उनके जीवन के विभिन्न चरणों का जीवंत चित्रण किया गया। हर झांकी समाज को अलग-अलग संदेश देती नजर आई। विशेष रूप से एक झांकी में भ्रष्टाचार, चोरी, डकैती और मदिरापान जैसे पापों के परिणामस्वरूप नर्क की स्थिति को दर्शाया गया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
यह ऐतिहासिक रथ करीब एक सदी पुराना है। प्रारंभ में यह साधारण रथ था, जिसे लगभग 50 वर्ष पहले स्वर्ण पत्रों से सजाया गया। पहले इसे बैलों या वाहनों से खींचा जाता था, लेकिन पिछले 20 वर्षों से समाज के श्रद्धालु स्वयं रस्सों को कंधों पर रखकर इसे खींचते आ रहे हैं।
रथ को खींच रहे महेश जैन ने बताया कि यह उनके लिए गर्व और आस्था का विषय है, और समाज के लोग मिलकर इस परंपरा को निभा रहे हैं।
यह शोभायात्रा मुंशी बाजार से प्रारंभ होकर जैन नसिया जी तक पहुंचेगी। अलवर में महावीर जयंती का विशेष महत्व है, जहां जैन समाज के चारों वर्ग बारी-बारी से आयोजन की जिम्मेदारी संभालते हैं। इस यात्रा का मुख्य संदेश “जियो और जीने दो” रहा।
इस दौरान फिर एक बार नील गाय की हत्या के कानून का विरोध करते हुए हाथों में तख्तियां लेकर नील गाय को बचाने के लिए सरकार तक संदेश भेजने का प्रयास किया गया ।
शहर में जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए हैं और करीब 2 किलोमीटर लंबी इस शोभायात्रा में महिला-पुरुष भजनों पर झूमते नजर आए, जिससे पूरे शहर में भक्ति और उत्साह का वातावरण बना रहा।