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ईरान चीन के करीब, US से टकराव के बीच CM‑302 डील

मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ते ही, Iran और China के बीच रक्षा सहयोग का बड़ा सौदा फाइनल होने के करीब है। ईरान चीन से CM‑302 सुपरसोनिक एंटी‑शिप मिसाइलें खरीदने जा रहा है, जो अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर तक डुबो सकती हैं।


12 दिन की इजरायल-ईरान जंग के बाद तेज हुई बातचीत

पिछले दो वर्षों से चली बातचीत को जून 2025 में हुई 12 दिन की इजरायल-ईरान झड़प ने गति दी। 1980 के दशक में चीन ईरान का प्रमुख हथियार सप्लायर था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते साझेदारी कम हो गई थी।

क्षेत्रीय तनाव और US की सक्रियता ने ईरान-चीन संबंधों को फिर से मजबूती दी है।


CM‑302 मिसाइल डील लगभग तैयार

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच CM‑302 सुपरसोनिक एंटी‑शिप क्रूज मिसाइल की खरीद पर समझौता अंतिम चरण में है।

CM‑302 की खासियत:

  • 290 किलोमीटर रेंज
  • सुपरसोनिक स्पीड
  • समुद्री सतह के बेहद करीब उड़ान
  • जहाजों की एयर डिफेंस को चकमा देने में सक्षम
  • एयरक्राफ्ट कैरियर तक डुबाने की क्षमता

विशेषज्ञ मानते हैं कि इसे इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल है और ईरान को भारी सामरिक बढ़त दे सकती है।


UN प्रतिबंधों की चुनौती

CM‑302 मिसाइलें ईरान को दिए जाने वाले सबसे उन्नत हथियारों में होंगी। यह कदम 2006 में UN द्वारा लगाए गए हथियार प्रतिबंधों को चुनौती देता है, जो 2015 के परमाणु समझौते में निलंबित थे और 2025 में फिर से लागू हो गए।

यह सौदा न केवल ईरान की समुद्री मारक क्षमता बढ़ाएगा बल्कि क्षेत्रीय सामरिक संतुलन को भी बदल सकता है।


अमेरिका और चीन का रणनीतिक खेल

सौदा अमेरिका की ईरान को दबाने की रणनीति को जटिल बना सकता है। चीन का उद्देश्य पश्चिमी शासन को ईरान में रोकना और अपने हितों को सुरक्षित रखना है।

कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ इस चर्चा से ही अमेरिका के रणनीतिक प्लान में असमंजस पैदा हो सकता है।


अमेरिका की प्रतिक्रिया

पिछले साल अमेरिका ने कई चीनी संस्थाओं पर पाबंदी लगाई, यह आरोप लगाते हुए कि वे ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम में मदद कर रही थीं। चीन ने आरोपों को खारिज किया और कहा कि वह निर्यात नियंत्रण का पालन करता है।

साथ ही, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को 10 दिनों का अल्टीमेटम दिया था कि परमाणु समझौते पर बात न हुई तो सैन्य कार्रवाई होगी।

ईरान-चीन मिसाइल डील मध्य-पूर्व में शक्ति संतुलन बदल सकती है और US के लिए रणनीतिक चुनौती पेश कर सकती है।

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