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खुशखेड़ा पटाखा फैक्ट्री अग्निकांड: एटक ने की न्यायिक जांच व मृतक मजदूरों के परिजनों को 50-50 लाख मुआवजे की मांग…

भिवाड़ी के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण अग्निकांड में सात मजदूरों की मौत के मामले को लेकर अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) अलवर जिला इकाई ने बुधवार को जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। एटक ने मामले की न्यायिक जांच कराने और मृतक मजदूरों के आश्रितों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है।

ज्ञापन देने से पहले भवानी तोप सर्किल पर एकत्रित हुए मजदूरों व कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली, जो मिनी सचिवालय पहुंचकर सभा में परिवर्तित हुई। सभा को संबोधित करते हुए जिला महासचिव ने कहा कि खुशखेड़ा फैक्ट्री की घटना कोई सामान्य हादसा नहीं है। फैक्ट्री में अवैध रूप से पटाखा निर्माण किया जा रहा था और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण आग लगने से सात मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों की पहचान मेडिकल व डीएनए परीक्षण के आधार पर की जा रही है।

एटक ने आरोप लगाया कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार फैक्ट्री संचालक हेमंत शर्मा के बड़े भाई योगेश शर्मा पुलिस में हेड कांस्टेबल थे और भिवाड़ी की जिला स्पेशल टीम में तैनात थे। घटना के बाद स्पेशल टीम को भंग कर योगेश शर्मा सहित दिनेश कुमार, विजय कुमार और जसपाल मान सिंह को लाइन हाजिर किया गया। संगठन का आरोप है कि इस तरह की अवैध गतिविधियां पुलिस संरक्षण के बिना संभव नहीं हैं।

एटक नेताओं ने कहा कि हादसे के बाद प्रशासन द्वारा औद्योगिक इकाइयों की जांच में चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आ रही हैं। कई फैक्ट्रियों के पास फायर एनओसी नहीं है और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा, फिर भी फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं। अलवर के मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र में भी अनियमितताओं की रिपोर्ट सामने आ रही है, जो व्यापक भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।

सभा को संबोधित करते हुए कहा गया कि इस हादसे के लिए जितना जिम्मेदार फैक्ट्री संचालक है, उतनी ही जिम्मेदारी पुलिस व स्थानीय प्रशासन की भी बनती है। इसलिए केवल प्रशासनिक जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता, निष्पक्ष न्यायिक जांच जरूरी है।

एटक ने मजदूरों से संगठित होकर अपनी सुरक्षा के अधिकार के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि श्रमिक कानूनों में किए गए बदलावों से मजदूरों के अधिकार कमजोर हुए हैं। ऐसे में मजदूरों को अपने हक और सुरक्षा के लिए संगठित संघर्ष करना होगा।

एटक ने ज्ञापन में सरकार से मांग की कि मृतक मजदूरों के आश्रितों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। संगठन ने कहा कि सरकार भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र से हजारों करोड़ रुपये का टैक्स वसूलती है, जिसमें मजदूरों के खून-पसीने की कमाई शामिल है। वर्तमान में 3-3 लाख रुपये मुआवजे की जो चर्चा है, वह नाकाफी है।

“यह कोई साधारण हादसा नहीं है, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और मिलीभगत का नतीजा है। मृतक मजदूरों के परिवारों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा और पूरे मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए।”

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