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कौन हैं तारिक रहमान? जेल से निर्वासन और अब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद तक का सफर

🇧🇩 बांग्लादेश की राजनीति में नई पारी

Tarique Rahman अब बांग्लादेश की राजनीति के केंद्र में हैं। उनकी पार्टी Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने 13वें आम चुनाव में दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल किया है। इस जीत के साथ तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं।

लंबे समय तक निर्वासन में रहने के बाद सत्ता में वापसी उनकी राजनीतिक यात्रा का बड़ा मोड़ माना जा रहा है।


👶 बचपन से ही राजनीतिक उथल-पुथल

तारिक रहमान का जन्म 1967 में हुआ, जब बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान कहलाता था। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान, जब वे महज चार साल के थे, उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में रखा गया था।

उनके पिता Ziaur Rahman बांग्लादेश के राष्ट्रपति रहे और सेना पृष्ठभूमि से राजनीति में आए थे। 1975 के तख्तापलट और उसके बाद की राजनीतिक घटनाओं ने देश की दिशा बदल दी।

इसी दौर में देश के संस्थापक नेता Sheikh Mujibur Rahman की हत्या हुई, जिससे जिया और शेख परिवारों के बीच दशकों लंबा राजनीतिक टकराव शुरू हुआ।


⚔️ ‘बेगमों की लड़ाई’ और पारिवारिक विरासत

तारिक की मां Khaleda Zia बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। दूसरी ओर, Sheikh Hasina के नेतृत्व में अवामी लीग सत्ता में रही।

दोनों परिवारों के बीच सत्ता संघर्ष को अक्सर “बेगमों की लड़ाई” कहा गया। दशकों तक यही प्रतिद्वंद्विता बांग्लादेश की राजनीति का केंद्र रही।


🎓 छात्र राजनीति से राष्ट्रीय मंच तक

बीएनपी के अनुसार, तारिक ने ढाका विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पढ़ाई की और युवावस्था में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। सैन्य शासक Hussain Muhammad Ershad के खिलाफ आंदोलन के दौरान उन्होंने पार्टी संगठन में अपनी भूमिका मजबूत की।


⛓️ गिरफ्तारी, सजा और निर्वासन

2007 में उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। बाद में वे इलाज के लिए 2008 में लंदन चले गए और करीब 17 साल तक देश से बाहर रहे।

2018 में 2004 में शेख हसीना की रैली पर हुए हमले के मामले में उन्हें अनुपस्थिति में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। बीएनपी ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया।


🔄 वापसी और सत्ता की ओर

राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव और पारिवारिक हालात के बाद तारिक ने फिर से सक्रिय भूमिका निभाई। मां खालिदा जिया के निधन के बाद उन्हें BNP का प्रमुख बनाया गया।

पहले ही चुनाव में प्रचंड जीत ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे सिर्फ विरासत के वारिस नहीं, बल्कि स्वयं एक प्रभावशाली राजनीतिक नेता बन चुके हैं।


📊 विरासत बनाम व्यक्तिगत नेतृत्व

तारिक रहमान की राजनीति पर पारिवारिक विरासत की छाप स्पष्ट है, लेकिन हालिया चुनाव परिणाम बताते हैं कि उन्होंने संगठन और समर्थकों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई।

हालांकि, उनके सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं—राजनीतिक ध्रुवीकरण, आर्थिक मुद्दे और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संतुलित करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल होंगे।


चार साल की उम्र में हिरासत, किशोरावस्था में पिता की हत्या, फिर निर्वासन और अब संभावित प्रधानमंत्री पद—तारिक रहमान की कहानी बांग्लादेश की राजनीतिक उथल-पुथल से जुड़ी एक लंबी यात्रा है।

अब देखना होगा कि वे सत्ता में आने के बाद देश को किस दिशा में ले जाते हैं।

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Stv News Rajasthan

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