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दिल्ली जल बोर्ड की लापरवाही पर पुलिस सख्त, दो ठेकेदारों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट…

खुले गड्ढे ने ली जान, अब जिम्मेदारों पर शिकंजा

दिल्ली के जनकपुरी इलाके में दिल्ली जल बोर्ड (DJB) द्वारा खोदे गए खुले गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय बाइक सवार की मौत के मामले में पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। जांच के दौरान सामने आई गंभीर लापरवाही के चलते दो ठेकेदारों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं, जबकि अन्य आरोपियों की न्यायिक और पुलिस हिरासत बढ़ा दी गई है।


सीवर कार्य के दौरान मौत

शुक्रवार तड़के जनकपुरी इलाके में सीवर लाइन के लिए खोदे गए करीब 15 फीट गहरे गड्ढे में निजी बैंक कर्मचारी कमल ध्यानी बाइक सहित गिर गया। गड्ढा खुला और बिना किसी चेतावनी संकेत के छोड़ा गया था। अंधेरे और सुरक्षा इंतजामों की कमी के चलते यह हादसा हुआ, जिसमें युवक की मौके पर ही मौत हो गई।


ठेकेदारों पर गैर-जमानती वारंट

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में ठेकेदार भाइयों हिमांशु गुप्ता और कविश गुप्ता के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए हैं। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी फिलहाल फरार हैं और उनकी तलाश की जा रही है। वहीं उप-ठेकेदार राजेश कुमार प्रजापति की पुलिस हिरासत एक दिन के लिए बढ़ा दी गई है।


सूचना छिपाने का आरोप

घटनास्थल पर मौजूद मजदूर योगेश को भी इस मामले में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। आरोप है कि उसके सामने ही बाइक सवार गड्ढे में गिरा, लेकिन उसने न तो पुलिस को सूचना दी और न ही आपात सेवाओं को बुलाया। उल्टा, उसने पहले उप-ठेकेदार को फोन किया और पीड़ित के परिजनों को भी गुमराह किया।


दम घुटने से हुई मौत

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पीड़ित की मौत चोट लगने से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि गड्ढे में गिरने के बाद मिट्टी मुंह और नाक में भर गई, जिससे सांस रुक गई। पीड़ित औंधे मुंह पड़ा मिला था और छाती पर भारी दबाव के निशान पाए गए।


साइलेंसर से जली जांघ

रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि दाहिनी जांघ पर जलने के निशान बाइक के साइलेंसर की वजह से थे। शुरुआती तौर पर मौत को दुर्घटना माना जा रहा है, लेकिन पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी।


लापरवाही बनी जानलेवा

यह हादसा एक बार फिर राजधानी में चल रहे निर्माण कार्यों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। खुले गड्ढे, चेतावनी संकेतों की कमी और हादसे के बाद सूचना न देना—इन सभी ने मिलकर एक युवा की जान ले ली। अब देखना होगा कि सख्त कार्रवाई से भविष्य में ऐसी लापरवाहियों पर लगाम लगती है या नहीं।

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