राजस्थान हाईकोर्ट में ‘वर्किंग सैटरडे’ पर टकराव, वकीलों का बहिष्कार; न्यायिक कामकाज प्रभावित
राजस्थान हाईकोर्ट में हर महीने दो शनिवार अदालत खोलने के फैसले को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इसी मुद्दे पर शनिवार को वकीलों ने स्वैच्छिक कार्य बहिष्कार किया, जिससे कई मामलों की सुनवाई प्रभावित होने की आशंका है। बार एसोसिएशन और न्यायपालिका के बीच संवाद की कमी इस विवाद को और तीखा बना रही है।
वर्किंग सैटरडे पर विरोध — क्यों ठप हुआ काम
हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा हर महीने दो शनिवार को कार्यदिवस घोषित करने के फैसले के विरोध में अधिवक्ताओं ने काम से दूरी बनाई। वकीलों का कहना है कि निर्णय से पहले उनके सुझावों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया, इसलिए उन्होंने प्रतीकात्मक विरोध का रास्ता चुना।
बार एसोसिएशन का आरोप — रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का कहना है कि पांच जजों की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को सौंप दी है, लेकिन बार को इसकी जानकारी नहीं दी गई। वकीलों का आरोप है कि पारदर्शिता की कमी से भ्रम और असंतोष बढ़ रहा है।
फैसले की पृष्ठभूमि — लंबित मामलों का दबाव
दिसंबर 2025 में हुई फुल कोर्ट मीटिंग में तय किया गया था कि जनवरी 2026 से हर महीने दो शनिवार कोर्ट खुलेगा। उद्देश्य था लंबित मामलों की संख्या कम करना और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करना। हालांकि, वकीलों का कहना है कि अतिरिक्त कार्यदिवस के व्यावहारिक और पेशेगत प्रभावों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई।
पक्षकारों पर असर — सुनवाई टलने की संभावना
आज जिन मामलों की सुनवाई सूचीबद्ध थी, उनमें कई मामलों के स्थगित होने या नई तारीख मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे न्याय की प्रक्रिया में देरी हो सकती है, खासकर उन मामलों में जो पहले से लंबित हैं।
न्यायिक सुधार बनाम पेशेगत संतुलन
यह विवाद न्यायिक सुधार और वकीलों के कार्य संतुलन के बीच टकराव को दर्शाता है। अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए सभी पक्षों की सहमति और व्यावहारिक समाधान अहम होते हैं। यदि संवाद नहीं बढ़ा तो भविष्य में ऐसे विरोध न्यायिक कामकाज को और प्रभावित कर सकते हैं।