गजनवी पर बयान से सियासी भूचाल, भाजपा ने हामिद अंसारी पर इतिहास से छेड़छाड़ का आरोपनई दिल्ली | राजनीतिक विवाद
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक बयान को लेकर शुक्रवार को देश की राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई। एक इंटरव्यू में दिए गए उनके बयान के बाद भाजपा ने उन पर इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुत करने और विदेशी आक्रांताओं के कृत्यों को हल्का करने का आरोप लगाया है।
अंसारी का बयान: ‘गजनवी और लोदी बाहर से नहीं आए’
हामिद अंसारी ने इंटरव्यू में कहा कि जिन शासकों को इतिहास की पुस्तकों में विदेशी आक्रमणकारी बताया जाता है—जैसे महमूद गजनवी या लोदी—वे वास्तव में “हिंदुस्तानी लुटेरे” थे और बाहर से नहीं आए थे। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक विमर्श में इन शासकों को लेकर यह प्रचार किया गया कि उन्होंने धार्मिक स्थलों को नष्ट किया।
भाजपा का पलटवार: आक्रमणों को सफेदपोश करने की कोशिश
भाजपा ने अंसारी के बयान को तथ्यों के विपरीत बताते हुए कड़ा विरोध जताया। पार्टी का कहना है कि महमूद गजनवी को भारतीय बताकर भारत पर हुए उसके हमलों की गंभीरता को कम किया जा रहा है। भाजपा नेताओं के अनुसार यह बयान इतिहास में दर्ज क्रूर आक्रमणों को नजरअंदाज करने जैसा है।
शहजाद पूनावाला का आरोप: हिंदू अत्याचारों को कमतर दिखाया जा रहा
भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस और उससे जुड़े विचारधारा वाले लोग लगातार ऐसे ऐतिहासिक पात्रों का महिमामंडन करते रहे हैं, जिनके दौर में हिंदू धार्मिक स्थलों और समाज पर अत्याचार हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि अंसारी का बयान उसी सोच का हिस्सा है।
राहुल गांधी से रुख स्पष्ट करने की मांग
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मांग की कि वे यह स्पष्ट करें कि क्या वे हामिद अंसारी के बयान से सहमत हैं। केसवन ने कहा कि यह मुद्दा केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों और राष्ट्रीय स्मृति से जुड़ा हुआ है।
गजनवी के हमले और मंदिरों को नुकसान का दावा
भाजपा नेताओं ने कहा कि इतिहास में दर्ज है कि महमूद गजनवी ने 11वीं सदी में भारत पर कई बार आक्रमण किए। इन हमलों के दौरान मथुरा और सोमनाथ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचा। पार्टी ने इस विवाद को कांग्रेस के उस पुराने रुख से भी जोड़ा, जिसमें सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया गया था।