विश्वेंद्र सिंह का ऐलान: ‘13 फरवरी को मोती महल पर फहराऊंगा रियासतकालीन झंडा, रोक सको तो रोक लो’
भरतपुर राजपरिवार का विवाद फिर गरमाया
भरतपुर के पूर्व राजपरिवार में मोती महल पर रियासतकालीन झंडा फहराने को लेकर चला आ रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर खुला ऐलान करते हुए कहा है कि वह 13 फरवरी को महाराजा सूरजमल की जयंती पर स्वयं मोती महल पहुंचकर झंडा फहराएंगे, चाहे कोई उन्हें रोकने की कोशिश ही क्यों न करे।
13 फरवरी को झंडा फहराने की चेतावनी
विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि अगर उनकी पत्नी दिव्या सिंह और बेटा अनिरुद्ध सिंह रियासतकालीन झंडा नहीं लगाते हैं, तो वह खुद मोती महल जाकर यह काम करेंगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—“किसी में हिम्मत है तो मुझे रोककर दिखा दे।”
पिछले साल से खाली पड़ा है मोती महल
गौरतलब है कि 22 सितंबर 2025 को मोती महल पर लगा झंडा एक युवक द्वारा हटा दिया गया था। इसके बाद से अब तक वहां कोई भी झंडा नहीं लगाया गया है। इसी मुद्दे को लेकर राजपरिवार के भीतर और बाहर विवाद लगातार बना हुआ है।
युद्ध भूमि के झंडे पर भड़का था विवाद
इससे पहले मोती महल पर रियासतकालीन झंडे की जगह युद्ध भूमि का झंडा लगाया गया था, जिस पर सर्व समाज ने कड़ा विरोध जताया था। सितंबर 2025 में जिलेभर में कई पंचायतें हुईं, जिनमें यह फैसला लिया गया कि 21 सितंबर 2025 को युद्ध भूमि का झंडा हटाकर रियासतकालीन झंडा लगाया जाएगा।
परिवार के भीतर ही उलझा है पूरा मामला
यह विवाद सिर्फ झंडे तक सीमित नहीं है। विश्वेंद्र सिंह का अपनी पत्नी दिव्या सिंह और बेटे अनिरुद्ध सिंह से लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा है। बताया जाता है कि इस टकराव की जड़ राजघराने की करोड़ों की संपत्ति, कीमती स्वर्ण-आभूषण और ऐतिहासिक एंटीक वस्तुएं हैं।
झंडे की रस्सी काटे जाने का भी आरोप
विश्वेंद्र सिंह ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि रियासतकालीन झंडे की रस्सी और तार तक काट दिए गए हैं। इसके बावजूद वह 13 फरवरी को महाराजा सूरजमल की जयंती के दिन मोती महल पहुंचकर झंडा फहराएंगे।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
विश्वेंद्र सिंह के इस ऐलान के बाद प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। मोती महल जैसे संवेदनशील स्थल पर संभावित टकराव को लेकर अब प्रशासन की तैयारियों पर नजरें टिकी हुई हैं।
आस्था, विरासत और सत्ता का टकराव
मोती महल पर झंडा फहराने का विवाद सिर्फ एक प्रतीकात्मक मुद्दा नहीं, बल्कि भरतपुर की ऐतिहासिक विरासत, राजपरिवार की आंतरिक कलह और सामाजिक भावनाओं से जुड़ा मामला है। विश्वेंद्र सिंह का खुला ऐलान आने वाले दिनों में राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर तनाव बढ़ा सकता है। अब देखना होगा कि 13 फरवरी को हालात किस दिशा में जाते हैं।